भोपाल। चंदेरी और भोपाल में सामने आए बहुचर्चित फर्जी आईएएस (IAS) तृप्ति सिंह मामले में पुलिस जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पूछताछ में यह बात सामने आई है कि तृप्ति और उसके भाई सुधांशु नौकरी के नाम पर भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बनाते थे, जबकि उनके इस सिंडिकेट के लिए फर्जी जॉइनिंग लेटर और सरकारी दस्तावेज तैयार करने का काम उनका साथी प्रखर करता था। प्रखर इन दस्तावेजों को बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का शातिर तरीके से इस्तेमाल करता था ताकि पीड़ितों को कागजात पूरी तरह असली लगें।
लखनऊ से गिरफ्तार हुआ साथी प्रखर, लैपटॉप जब्त
चंदेरी पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सुरागों के आधार पर मुख्य फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले आरोपी प्रखर को लखनऊ से धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद उसके कब्जे से एक लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, डिजिटल फोरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितने फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और किन-किन लोगों को भेजे गए थे। पूछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया गया है, और पुलिस उसे भोपाल लाकर इस पूरे नेटवर्क की गहरी कड़ियां खंगालने की तैयारी कर रही है।
मजे-मजे में शुरू हुआ खेल बाद में बना ठगी का जरिया
बाग सेवनिया पुलिस की रिमांड पर चल रहे आरोपी भाई-बहन (तृप्ति और सुधांशु) ने पूछताछ में कबूल किया है कि उन्होंने यह सब शुरुआत में केवल शौक, रुसूख और मजे के लिए शुरू किया था। तृप्ति खुद को आईएएस अधिकारी बताकर वीआईपी ट्रीटमेंट हासिल करती थी, सरकारी रेस्ट हाउसों में ठहरती थी और पर्यटन स्थलों पर प्रभाव जमाती थी। लेकिन जब उसकी इस फर्जी पहचान पर किसी ने शक नहीं किया, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ गया और उसने अपने भाई के साथ मिलकर इसे सुनियोजित ठगी का धंधा बना लिया।
गाइड की बेटी को नौकरी का झांसा देकर 3 लाख की ठगी
जांच में यह भी सामने आया कि चंदेरी के किला कोठी में तृप्ति की मुलाकात एक स्थानीय टूरिस्ट गाइड से हुई थी। खुद को आईएएस अधिकारी बताकर उसने गाइड की बेटी को मध्य प्रदेश टूरिज्म (MPT) में नौकरी लगवाने का झांसा दिया और उससे 3 लाख रुपए ऐंठ लिए। आरोपी ने गाइड के मोबाइल पर फर्जी जॉइनिंग लेटर भी भेजा था, जिसे शक से बचने के लिए करीब 37 मिनट बाद डिलीट कर दिया गया था।
मनी ट्रेल और बैंक खातों की हो रही है जांच
भोपाल की बाग सेवनिया पुलिस दोनों आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस अब इस पूरी ठगी का 'मनी ट्रेल' (रकम का रूट) खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी गई रकम किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर हुई और इस सिंडिकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। बैंक ट्रांजैक्शन और चैट के खुलासे के बाद इस मामले में कई और नए नाम सामने आने की पूरी संभावना है।




