बैतूल/चिचोली, सुरेन्द्र बावने। बैतूल जिले के चिचोली ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले आदिवासी बाहुल्य ग्राम गवासेन में बुनियादी सुविधाओं के अभाव और बंद पड़े मोबाइल टावर के कारण एक ग्रामीण की समय पर इलाज न मिलने से हुई मौत के बाद भारी बवाल खड़ा हो गया है। इस दुखद घटना से आक्रोशित सैकड़ों ग्रामीणों और युवाओं ने शुक्रवार को ग्राम पंचायत भवन गवासेन का घेराव कर दिया। उग्र भीड़ ने प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए सरपंच, उपसरपंच और सचिव को खरी-खोटी सुनाई। ग्रामीणों का गुस्सा यहीं नहीं रुका, उन्होंने सरपंच धनसिंह काजले को जबरन दफ्तर से बाहर निकाला और पंचायत भवन के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया।


जंगली और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण ग्राम पंचायत गवासेन के लोग लंबे समय से बंद पड़े मोबाइल नेटवर्क, अघोषित बिजली कटौती और पीने के पानी की गंभीर किल्लत से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में मोबाइल टावर तो खड़ा है, लेकिन वह महीनों से बंद पड़ा है। नेटवर्क न होने के कारण गांव में जब भी कोई दुर्घटना या आपातकालीन स्थिति निर्मित होती है, तो लोग एम्बुलेंस या डॉक्टर से संपर्क नहीं कर पाते हैं। विगत दिनों भी एक ग्रामीण की तबीयत अचानक खराब हुई थी, लेकिन समय पर मोबाइल नेटवर्क न मिलने के कारण एम्बुलेंस को सूचना नहीं दी जा सकी और तड़प-तड़प कर उसकी मौत हो गई। इसी घटना ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया और पूरा गांव सड़क पर उतर आया।


पंचायत भवन में ताला बंदी की सूचना मिलते ही वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद सरपंच धनसिंह काजले ने वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) के माध्यम से जिले के उच्च प्रशासनिक अधिकारियों से फोन पर बातचीत की। प्रदर्शन कर रहे गांव के युवाओं ने बेहद आक्रोशित लहजे में कहा कि आज देश डिजिटल इंडिया बनने का दम भर रहा है, लेकिन आज भी हमारे गांव में मोबाइल फोन चलाना एक सपना बना हुआ है। देश को आजाद हुए 75 साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज भी गवासेन जैसी आदिवासी पंचायतों को डिजिटल कनेक्टिविटी, बिजली, पानी, पक्की सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी प्राथमिक आवश्यकताओं के लिए तरसना पड़ रहा है।


काफी देर तक चले हंगामे के बाद सरपंच और वन परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा एक सप्ताह के भीतर मोबाइल टावर को चालू करवाने और अन्य समस्याओं के निराकरण का ठोस आश्वासन दिया गया। इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने शांत होकर जिला कलेक्टर के नाम एक विस्तृत ज्ञापन वन अधिकारी को सौंपा। ग्रामीणों ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी जायज समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे उग्र चक्काजाम और धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। वहीं इस मामले में अपनी बेबसी जाहिर करते हुए सरपंच धनसिंह काजले ने कहा कि वे खुद इस संबंध में तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर सहित क्षेत्रीय विधायक और सांसद तक को कई बार लिखित आवेदन देकर गुहार लगा चुके हैं, लेकिन गवासेन पंचायत की सुध लेने वाला कोई नहीं है। सरपंच ने ऐलान किया कि अब वे खुद अपनी जनता के हक के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे और यदि जरूरत पड़ी तो ग्रामीणों के साथ नेशनल हाईवे पर भूख हड़ताल और उग्र आंदोलन पर बैठेंगे।