सागर, जीशान खान। मध्य प्रदेश के जिन शासकीय विद्यालयों में अब तक छात्र-छात्राओं के लिए समुचित शौचालयों की व्यवस्था नहीं है, वहां जल्द ही बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। कनाडा का एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत प्रदेश के ऐसे स्कूलों में टॉयलेट निर्माण के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने आगे आया है। इस संबंध में सागर विधायक शैलेंद्र जैन ने स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से मुलाकात कर लीगल राइट काउंसिल इंटरनेशनल का औपचारिक प्रस्ताव पत्र सौंपा। शिक्षा मंत्री ने इस पहल पर बेहद सकारात्मक रुख अपनाते हुए जल्द ही काउंसिल के प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक करने और एमओयू (समझौता ज्ञापन) की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का भरोसा दिया है।


सीएसआर फंड से होगा निर्माण, छात्राओं को मिलेगी बड़ी राहत

प्रस्ताव के अनुसार, प्रदेश भर के ऐसे सरकारी स्कूलों का प्राथमिकता के आधार पर सर्वे कर उन्हें चिन्हित किया जाएगा जहां आज भी बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं का अभाव है। स्कूलों में टॉयलेट न होने से विद्यार्थियों, विशेष रूप से छात्राओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कई बार यह समस्या उनकी पढ़ाई में भी बाधा बनती है। कनाडा के एनजीओ से मिलने वाले सीएसआर फंड के जरिए इन स्कूलों में आधुनिक और स्वच्छ शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को न केवल बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा, बल्कि उनके स्वास्थ्य और स्वच्छता मानकों में भी बड़ा सुधार आएगा।


विधायक शैलेंद्र जैन ने शिक्षा मंत्री के समक्ष रखा प्रस्ताव

सामाजिक आवश्यकता और छात्राओं की समस्याओं को देखते हुए लीगल राइट काउंसिल इंटरनेशनल की प्रदेश अध्यक्ष अनुश्री जैन ने इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग की रूपरेखा तैयार की थी। सागर विधायक शैलेंद्र जैन ने संस्था का पत्र स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को व्यक्तिगत रूप से सौंपा और ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों के जरूरतमंद स्कूलों में इस योजना को तेजी से लागू करने का आग्रह किया। विधायक ने सकारात्मक आश्वासन मिलने पर मंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह साझेदारी प्रदेश के सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी।


बैठक के बाद तैयार होगा एमओयू, जल्द तय होगी रूपरेखा

स्कूल शिक्षा विभाग और संस्था के बीच प्रस्तावित औपचारिक बैठक के बाद योजना के क्रियान्वयन की विस्तृत तस्वीर साफ होगी। हालांकि अभी चिन्हित किए जाने वाले स्कूलों की संख्या, निर्माण कार्य का कुल बजट और काम शुरू होने की समयसीमा तय होना बाकी है, लेकिन विभाग स्तर पर सहमति बनने से इस प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। विभागीय अधिकारियों और काउंसिल पदाधिकारियों के बीच होने वाली बैठक के बाद एमओयू ड्राफ्ट किया जाएगा, जिसके आधार पर चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।