भोपाल, सुबोध त्रिपाठी। मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों को चौंकाते हुए एक बड़ा फेरबदल किया है। सरकार द्वारा देर रात जारी की गई एक असाधारण राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल से उनका सबसे महत्वपूर्ण 'पशुपालन एवं डेयरी विभाग' वापस ले लिया गया है। अब यह भारी-भरकम विभाग सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अधीन रहेगा।

विभागीय बदलाव की यह गाज गिरने के बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है। इस बड़े फैसले के बाद अब राज्यमंत्री लखन पटेल के पास केवल 'आनंद विभाग' का स्वतंत्र प्रभार ही शेष रह गया है।


अधिसूचना जारी, सामान्य प्रशासन विभाग ने लगाई मुहर

मध्यप्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला के हस्ताक्षरों से जारी अधिसूचना (क्रमांक GAD-4-0007-2026) के तहत मध्यप्रदेश शासन कार्य (आवंटन) नियम में यह आंशिक संशोधन किया गया है। 30 दिसंबर 2023 को जारी मूल अधिसूचना में आंशिक बदलाव करते हुए राज्यपाल के नाम से यह नया आदेश जारी किया गया, जिसने लखन पटेल के पर कतर दिए हैं।


मुख्यमंत्री के पास पहुंचे विभाग, बढ़ा कद

इस फेरबदल के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास अब प्रदेश के सभी सबसे प्रमुख विभाग केंद्रित हो गए हैं। राजपत्र के अनुसार, मुख्यमंत्री अब निम्नलिखित विभागों का प्रभार संभालेंगे:

  • मुख्य विभाग: गृह, जेल, सामान्य प्रशासन, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, और जनसंपर्क।
  • नए व अन्य विभाग: पशुपालन एवं डेयरी विभाग, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज साधन, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय।
  • विशेष अधिकार: वे सभी विभाग जो किसी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं हैं, वे भी मुख्यमंत्री के पास ही रिपोर्ट करेंगे।


छतरपुर और बुंदेलखंड अंचल में भी सुगबुगाहट तेज

दमोह जिले की पथरिया सीट से विधायक और बुंदेलखंड के कद्दावर नेता लखन पटेल से जुड़े इस घटनाक्रम के बाद पूरे बुंदेलखंड अंचल सहित छतरपुर के राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं बेहद गर्म हैं। पशुपालन विभाग को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गो-वंश संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जिस पर बुंदेलखंड में कई बड़ी योजनाएं प्रस्तावित थीं। ऐसे में अचानक मंत्री की इस विभाग से 'छुट्टी' होना क्षेत्रीय राजनीति में बड़े संकेत दे रहा है।

जानकारों का मानना है कि गोशालाओं के प्रबंधन और दुग्ध उत्पादन से जुड़ी हालिया योजनाओं की धीमी रफ्तार या फिर विभाग को सीधे मुख्यमंत्री की निगरानी में लाकर और अधिक गति देने के उद्देश्य से यह कड़ा कदम उठाया गया है।

इस पूरी प्रशासनिक हलचल का आधिकारिक दस्तावेज़ देखने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी 14 जुलाई 2026 के राजपत्र को देखा जा सकता है।


Adhishoochna