नई दिल्ली/दुबई (आयुष शुक्ला)। मध्य-पूर्व की आग अब वैश्विक ऊर्जा संकट में बदलती दिख रही है। ईरान और इज़राइल-अमेरिका के बीच जारी जंग के तीसरे दिन, सऊदी अरब की सबसे महत्वपूर्ण तेल सुविधा रास तनूरा (Ras Tanura) रिफाइनरी पर हमले की खबर ने दुनिया भर के बाजारों में हड़कंप मचा दिया है। Saudi Aramco की इस रिफाइनरी को एहतियातन बंद कर दिया गया है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई चेन के टूटने का खतरा पैदा हो गया है। इस मुद्दे पर जानकार आयुष शुक्ला की खास रिपोर्ट...
क्यों अहम है रास तनूरा?
सऊदी अरब के पूर्वी तट पर स्थित यह टर्मिनल दुनिया के सबसे बड़े ऑयल प्रोसेसिंग केंद्रों में से एक है। इसकी क्षमता 5.5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन रिफाइन करने की है। यह केवल एक रिफाइनरी नहीं, बल्कि एशिया और यूरोप के लिए तेल भेजने वाला मुख्य द्वार है। इसके बंद होने का मतलब है दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की रीढ़ का कमजोर होना।
वैश्विक बाजार में 'तेल का उबाल'
हमले की खबर मिलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 8–12% की भारी तेजी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बाधित हुआ—जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है—तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
भारत के लिए खतरे की घंटी: 3 बड़े असर
भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, इसलिए यह युद्ध हमारे लिए सीधा आर्थिक संकट है:
महंगा होगा ईंधन और राशन: कच्चे तेल के दाम बढ़ने से सीधे तौर पर पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें बढ़ेंगी। इसका असर माल ढुलाई पर पड़ेगा, जिससे सब्जियां, फल और रोजमर्रा का सामान (FMCG) महंगा हो जाएगा।
रुपये की कमजोरी: तेल का आयात बिल बढ़ने से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित होगा और डॉलर के मुकाबले रुपया और भी कमजोर हो सकता है।
महंगाई दर (Inflation): तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर की बढ़ोत्तरी भारत की थोक और खुदरा महंगाई दर को सीधा ऊपर ले जाती है।
क्या है भारत का 'कवच'?
भारत के पास संकट के समय के लिए स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) है, जो कुछ दिनों की आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है। साथ ही, रूस और अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से खरीद बढ़ाकर सरकार जोखिम कम करने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो आम जनता को महंगाई के झटकों से बचाना मुश्किल होगा।
कुल मिलाकर मध्य-पूर्व की यह जंग अब सीमाओं से बाहर निकलकर ग्लोबल किचन और बजट तक पहुँच चुकी है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि भारत सरकार को कीमतों को थामने के लिए टैक्स में कटौती जैसे कड़े कदम उठाने पड़ेंगे या नहीं।



