पटना। बिहार विधान परिषद के दो निर्दलीय सदस्यों के कथित तौर पर भाजपा में शामिल होने को लेकर विवाद गहरा गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दोनों सदस्यों की सदस्यता दलबदल विरोधी कानून के तहत रद्द करने की मांग की है।
तेजस्वी यादव ने कहा, "यह पूरी तरह स्पष्ट है कि कोई भी निर्दलीय एमएलसी चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हो सकता। यदि वह ऐसा करता है तो उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है। दोनों सदस्यों की सदस्यता तुरंत रद्द की जानी चाहिए, अन्यथा संविधान को फाड़कर फेंक देने जैसा होगा।"
यह विवाद बंशीधर ब्रजवासी (तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए) और राहुल राज (जो सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित) से जुड़ा है।
दोनों हाल ही में हुए बिहार विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीते थे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे।
पूर्व एमएलसी प्रोफेसर रामबली सिंह चंद्रवंशी के नेतृत्व में सोमवार को जन सुराज पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल बिहार विधान परिषद पहुंचा और परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को संबंधित दस्तावेजों के साथ एक औपचारिक याचिका सौंपी।
जन सुराज पार्टी ने दलबदल विरोधी कानून के तहत दोनों एमएलसी की सदस्यता तत्काल समाप्त करने की मांग की है। सभापति से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए चंद्रवंशी ने कहा कि बिहार को लोकतंत्र की जन्मस्थली माना जाता है और लोकतांत्रिक मूल्यों की नींव सार्वजनिक नैतिकता और जवाबदेही पर आधारित है।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के 72 घंटे के भीतर दोनों एमएलसी भाजपा कार्यालय पहुंचे और औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।
चंद्रवंशी के अनुसार, दोनों को पार्टी की सदस्यता रसीदें दी गईं और सदस्यता कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भाजपा का अंगवस्त्र भी पहना था।
उन्होंने आरोप लगाया कि कानूनी कार्रवाई की संभावना सामने आने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने सोशल मीडिया से उनसे संबंधित पोस्ट हटा दीं और बाद में दावा किया कि दोनों एमएलसी केवल भाजपा को समर्थन देने के लिए पार्टी कार्यालय गए थे।
चंद्रवंशी ने कहा कि जन सुराज के प्रतिनिधिमंडल ने सदस्यता रसीदों के नंबर सहित सभी दस्तावेजी साक्ष्य विधान परिषद सभापति को सौंप दिए हैं और अब इस मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कानूनी प्रावधानों का जिक्र करते हुए चंद्रवंशी ने बताया कि करीब तीन वर्ष पहले उन्हें भी इसी विधान परिषद में दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया था।
उन्होंने कहा, "तीन साल पहले मुझे भी इसी विधान परिषद से दल-बदल विरोधी कानून के तहत हटाया गया था। पार्टी के टिकट पर चुने गए सदस्यों के मामलों में कुछ व्याख्या की गुंजाइश हो सकती है, लेकिन 52वें संविधान संशोधन के तहत निर्दलीय सदस्यों के मामले में कानून बिल्कुल स्पष्ट है। यदि कोई निर्दलीय सदस्य चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है तो उसकी सदस्यता तत्काल समाप्त की जा सकती है।"
जन सुराज पार्टी ने सभापति से मामले में उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर दोनों सदस्यों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
इस विवाद ने अब विधायी निकायों में निर्दलीय निर्वाचित सदस्यों पर दल-बदल विरोधी कानून के लागू होने को लेकर बहस तेज कर दी है। मामले में अंतिम फैसला संविधान के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिया जाएगा।














