भोपाल। मध्य प्रदेश भाजपा ने अपनी नई 106 सदस्यीय प्रदेश कार्यसमिति घोषित कर राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया है। संगठनात्मक मजबूती के नाम पर पार्टी ने वो चेहरे संगठन के केंद्र में ला दिए हैं, जिन्हें कुछ समय पहले तक कांग्रेस का हिस्सा माना जाता था।
सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी के नाम को लेकर हो रही है। कांग्रेस में लंबे समय तक बड़े चेहरे रहे पचौरी को भाजपा ने स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाकर स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अब उनकी राह पार्टी के साथ है।
इसके अलावा कांग्रेस से आई पूर्व विधायक सविता दीवान को भी कार्यसमिति सदस्य बनाकर अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। नर्मदापुरम संभाग को भी खास तवज्जो दी गई है। राज्यसभा सांसद माया नारोलिया, झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक अखिलेश खंडेलवाल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व नर्मदापुरम विधायक डॉ. सीताशरण शर्मा को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
पूर्व राजस्व एवं कृषि मंत्री कमल पटेल को स्थायी समिति में जगह देकर भाजपा ने अनुभवी नेताओं को बनाए रखने की अपनी रणनीति भी दिखा दी है।
क्या है असली मायने?
राजनीतिक विश्लेषक इसे भाजपा की नई रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। आगामी चुनावी तैयारियों को देखते हुए पार्टी उन नेताओं को संगठन के अंदर लाकर सामाजिक संतुलन और अनुभव का समीकरण साध रही है, जिन्होंने हाल के वर्षों में भाजपा की विचारधारा के प्रति निष्ठा दिखाई है।
कांग्रेस छोड़कर आए इन दिग्गजों को मिला बड़ा सम्मान प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत दे रहा है। क्या यह सिर्फ संगठनात्मक फैसला है या आने वाले समय में और बड़े उलटफेर की तैयारी? सियासी गलियारों में इस सवाल पर चर्चा तेज हो गई है।




