भोपाल, जितेंद्र तिवारी| राजधानी भोपाल में जारी भारी आंधी-तूफान और प्री-मानसून की बारिश के बीच देर रात मेट्रो रेल परियोजना के निर्माण स्थल पर एक बड़ा हादसा हो गया। करोंद चौराहे के पास निर्माणाधीन मेट्रो पिलर का एक भारी-भरकम लोहे का फ्रेम अचानक एक ओर झुक गया। पिलर का ढांचा झुकने के कारण उसके पास से गुजर रही 11 केवी (KV) की हाई-टेंशन बिजली लाइन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। राहत की बात यह रही कि हादसा देर रात हुआ, जिससे एक बड़ा और दर्दनाक हादसा होने से टल गया और किसी भी प्रकार की जनहानि दर्ज नहीं हुई है।


देर रात 2:30 बजे आंधी का दबाव नहीं झेल सका पिलर फ्रेम

प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, घटना देर रात करीब 2:30 बजे की है। शहर में चल रही 70 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार वाली चक्रवाती आंधी के कारण करोंद चौराहे पर स्थित मेट्रो के निर्माणाधीन पिलर के लोहे के स्ट्रक्चर (फ्रेम) पर हवा का भारी दबाव बना। पिलर का अस्थायी ढांचा इस भीषण दबाव को सहन नहीं कर सका और एक तरफ झुक गया। झुकते ही पिलर का हिस्सा सीधे बिजली के तारों पर जा टिका, जिससे जोर का धमाका हुआ और लाइन क्षतिग्रस्त हो गई।


प्रशासन ने तुरंत बंद की बिजली, ट्रैफिक किया डाइवर्ट

हादसे की खबर मिलते ही भोपाल मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के इंजीनियर्स, जिला प्रशासन और पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। स्थिति की संवेदनशीलता और करंट फैलने के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने अभूतपूर्व मुस्तैदी दिखाई:


ब्लैकआउट: सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके की बिजली सप्लाई को तुरंत बंद (कट) करवा दिया गया।

रूट डाइवर्जन: करोंद चौराहे की ओर आने वाले भारी और हल्के वाहनों को दुर्घटनास्थल से काफी पहले ही रोककर दूसरे रास्तों पर डाइवर्ट किया गया, ताकि कोई वाहन इसकी चपेट में न आए।


स्थिति अब पूरी तरह सामान्य, जांच में जुटे आला अधिकारी

मेट्रो और बिजली कंपनी की तकनीकी टीमों ने रात में ही युद्धस्तर पर रेस्क्यू और मरम्मत का कार्य शुरू किया। क्रेन की मदद से झुके हुए पिलर फ्रेम को सीधा कर सुरक्षित किया गया और क्षतिग्रस्त बिजली की लाइनों को बदला गया। वर्तमान में करोंद चौराहे पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और सामान्य है। क्षेत्र की बिजली सप्लाई और बाधित ट्रैफिक को पूरी तरह बहाल कर दिया गया है। वहीं, मेट्रो प्रबंधन के उच्चाधिकारी मामले की तकनीकी जांच में जुट गए हैं कि निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों और आंधी के दबाव को लेकर कहाँ चूक हुई।