मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को महाराष्ट्र में अलग-अलग सरकारी सेवाओं के लिए भर्ती परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक, सुरक्षित और सबकी सहमति वाले सुधार लागू करने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाने का फैसला किया।
कमेटी को निर्देश दिया गया है कि वह राज्य के हर रेवेन्यू डिवीजन का दौरा करे, छात्रों से सीधे बातचीत करे और सिस्टम में बड़े बदलाव के उपायों की जानकारी देने वाली एक संयुक्त रिपोर्ट सौंपे। बैठक में मौजूद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने भी कई अहम सुझाव दिए।
मुख्यमंत्री का यह फैसला हाल ही में जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों और झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (जेपीएससी) व झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर झारखंड में चल रहे छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच आया है। सीएम फडणवीस ने अपने सरकारी आवास 'वर्षा' में बुलाई गई एक खास बैठक के दौरान ये निर्देश दिए।
जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट की एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, वी. राधा इस हाई-लेवल पैनल की अध्यक्षता करेंगी। कमेटी के सदस्यों में डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस सदानंद दाते, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी वीरेंद्र सिंह, एनिमल हसबेंडरी डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी एन. रामास्वामी और नासिक डिविजनल कमिश्नर प्रवीण गेदम शामिल हैं।
यह पैनल हर रेवेन्यू डिविजन का दौरा करेगा और स्टूडेंट्स, एजुकेशनल इंस्टिट्यूट के एडमिनिस्ट्रेटर्स और संबंधित स्टेकहोल्डर्स से बातचीत करके उनके सुझाव लेगा। इन्हीं सुझावों के आधार पर राज्य के लिए एक व्यापक पॉलिसी तैयार की जाएगी।
पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी को रोकने के लिए हाल ही में संसद द्वारा पास किए गए कड़े कानून का जिक्र करते हुए सीएम फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में पहले से ही अपना कानून मौजूद है, लेकिन केंद्र का कानून ज्यादा सख्त है। इसलिए, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अगले दो हफ्तों के भीतर महाराष्ट्र में केंद्रीय कानून को अपनाने और लागू करने की प्रक्रिया पूरी करें।
मुख्यमंत्री ने राज्य भर में कम से कम 25,000 सुरक्षित क्लासरूम बनाने का भी आदेश दिया। बैठक में कई संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई, जैसे कि डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर्स, पुलिस कमिश्नर्स, सुपरिटेंडेंट्स ऑफ पुलिस और सीनियर एजुकेशन अधिकारियों के बीच तालमेल के लिए स्पष्ट भूमिकाएं तय करना, ग्लोबल परीक्षा मॉडल्स की समीक्षा करना, मौजूदा कामकाज के तरीकों का मूल्यांकन करना और सुधार की संभावना वाले क्षेत्रों की पहचान करना।




