भोपाल, जीतेन्द्र यादव। जिस उम्र में बच्चे अमूमन खिलौनों से खेलते हैं या ठीक से हाथ में पेंसिल पकड़ना सीखते हैं, उस उम्र में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की दो सगी जुड़वां बहनों ने ड्रम सेट (Drum Set) पर अपनी थाप से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। भोपाल के एक प्रतिष्ठित चिकित्सक परिवार की नन्हीं बेटियों—सान्वी नाहर और समन्वी नाहर ने महज 3 वर्ष 9 माह की अल्पायु में 'यंगेस्ट फीमेल ड्रमर' (Youngest Female Drummer) का खिताब हासिल कर 'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन' (UK) में अपना नाम दर्ज करा लिया है। इस ऐतिहासिक और अविश्वसनीय गौरव के लिए दोनों मासूम बहनों को ब्रिटेन की संसद के प्रतिष्ठित 'हाउस ऑफ कॉमंस' में आयोजित एक भव्य अंतरराष्ट्रीय समारोह में मेडल, ट्रॉफी और प्रमाण-पत्र देकर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
ड्रमिंग को संगीत की सबसे कठिन और जटिल विधाओं में से एक माना जाता है, क्योंकि इसे बजाने के लिए दोनों हाथों और दोनों पैरों का एक साथ बेहद सटीक मानसिक व शारीरिक तालमेल (Co-ordination) जरूरी होता है। यही वजह है कि संगीत विशेषज्ञ बच्चों को पांच वर्ष की आयु पार करने के बाद ही ड्रम छूने की सलाह देते हैं। लेकिन सान्वी और समन्वी ने इस स्थापित धारणा को पूरी तरह बदल दिया और महज सवा तीन साल की उम्र से ही इस भारी-भरकम वाद्य यंत्र पर अपनी नन्हीं उंगलियों का जादू बिखेरना शुरू कर दिया।
1 मिनट 20 सेकंड का कड़ा इम्तिहान और ऐतिहासिक रिकॉर्ड
विश्व रिकॉर्ड की शर्तों के मुताबिक, इन नन्हीं बच्चियों को एक निर्धारित संगीत ट्रैक पर लगातार 1 मिनट 20 सेकंड तक बिना रुके और बिना किसी त्रुटि के ड्रम बजाना था। 21 मार्च 2026 को सान्वी और समन्वी ने इस कठिन चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए अद्भुत ड्रमिंग का प्रदर्शन किया। दोनों बहनों की इस बेजोड़ प्रस्तुति का वीडियो और आवश्यक दस्तावेज जब जांच के लिए लंदन भेजे गए, तो वहां की जूरी भी दंग रह गई। संस्था ने तत्काल इस रिकॉर्ड को अपनी हरी झंडी दी और इसे अपने आधिकारिक वैश्विक प्रकाशनों व डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रमुखता से दर्ज किया। इतनी कम उम्र में ड्रम बजाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाली यह जुड़वां जोड़ी पूरे भारत में पहली है।
जब नामी गुरुओं ने किया मना, तब भोपाल के 'योगी' ने स्वीकार की चुनौती
इस ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। बच्चियों की मां डॉ. निकिता नाहर ने बताया कि जब वे अपनी बेटियों की संगीत के प्रति ललक देखकर उन्हें ड्रम सिखाने के लिए शहर के कई बड़े संगीत शिक्षकों के पास लेकर गईं, तो लगभग सभी ने यह कहते हुए हाथ खड़े कर दिए कि इतनी छोटी उम्र के बच्चों को ड्रम सिखाना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
ऐसे मुश्किल समय में भोपाल की 'योगी म्यूजिक वैली एकेडमी' के ड्रम प्रशिक्षक युग (योग) नामदेव 'योगी' ने इन बच्चियों के भीतर छिपी असाधारण प्रतिभा को पहचाना और इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने दोनों बहनों को बिल्कुल जमीनी स्तर से विशेष तकनीक के जरिए कड़ा प्रशिक्षण देना शुरू किया।
- 2 महीने में बनाई पकड़: गुरु के मार्गदर्शन और बच्चों की लगन का नतीजा यह रहा कि मात्र दो महीने के भीतर ही दोनों बहनों ने ड्रम की मूल बीट्स (Basic Beats) पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली।
- पहला प्रदर्शन: इसके बाद एक स्कूल के कार्यक्रम में जब इन बच्चियों ने ड्रम पर थाप दी, तो वहां मौजूद हर शख्स आंखें फाड़े देखता रह गया। इसी कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की टीम तक पहुंचा था।
- कड़ी मेहनत: रिकॉर्ड को पुख्ता करने के लिए गुरु युग नामदेव के निर्देशन में दोनों बहनों ने करीब एक महीने तक प्रतिदिन उसी निर्धारित ट्रैक पर घंटों पसीना बहाया और अंततः सफलता की नई इबारत लिख दी।
डॉक्टरों के परिवार से हैं नन्हें अजूबे, रुचि को मिला सही मार्गदर्शन
यह नन्हें ग्लोबल ड्रमर्स भोपाल के एक बेहद प्रतिष्ठित और संभ्रांत चिकित्सक (Doctors) परिवार से ताल्लुक रखते हैं। सान्वी और समन्वी के दादा डॉ. अक्षय नाहर शहर के जाने-माने ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं, पिता डॉ. सक्षम नाहर सुप्रसिद्ध सर्जन हैं, जबकि मां डॉ. निकिता नाहर एक दंत चिकित्सक (Dentist) हैं। परिवार का मानना है कि यदि बच्चों की रुचि और ईश्वर प्रदत्त प्रतिभा को सही समय पर पहचानकर उन्हें उचित वातावरण, सही मार्गदर्शन और निरंतर प्रोत्साहन दिया जाए, तो वे किसी भी उम्र में असंभव से दिखने वाले लक्ष्यों को मुमकिन बना सकते हैं।
ट्रेनर्स और संगीत विशेषज्ञों का कहना है कि भोपाल और पूरे मध्य प्रदेश में ड्रमिंग को लेकर पहले बच्चों में ऐसा रुझान नहीं देखा जाता था, लेकिन सान्वी और समन्वी की इस वैश्विक कामयाबी ने अब दूसरे बच्चों और अभिभावकों के लिए भी प्रेरणा की नई राह खोल दी है। इन बच्चियों ने साबित कर दिया है कि सफलता के शिखर पर पहुंचने के लिए उम्र का कोई बंधन नहीं होता, बल्कि सही दिशा में किया गया प्रयास और हुनर ही आपकी असली पहचान बनता है।




