नई दिल्ली। कृषि एवं ग्रामीण विकास क्षेत्र की प्रमुख सहकारी संस्था कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड यानी कृभको (केआरआईबीएचसीओ) की 46वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित की गई, जिसमें संस्था के वित्तीय प्रदर्शन, सहकारिता क्षेत्र की प्रगति और किसानों को मिलने वाले लाभों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान कृभको के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संस्था की उपलब्धियों और सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को साझा किया।इस दौरान, कृभको के प्रबंध निदेशक एस.एस. यादव ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि 46वीं वार्षिक आम बैठक में लगभग 90 प्रतिशत प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जो संस्था के प्रति सदस्यों के विश्वास और जुड़ाव को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि बैठक में कृभको के वार्षिक खातों और अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। पिछले वित्त वर्ष के दौरान संस्था द्वारा किए गए कार्यों और उपलब्धियों को भी प्रतिनिधियों के सामने रखा गया।
एस.एस. यादव ने कहा कि कृभको का वित्तीय प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में संस्था के लाभ में लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इस वर्ष कृभको ने 825 करोड़ रुपए का मुनाफा अर्जित किया है। उन्होंने बताया कि संस्था ने अपने उपनियमों के अनुसार सदस्य सहकारी समितियों के लिए 20 प्रतिशत लाभांश देने की घोषणा की है, जो अधिकतम अनुमेय लाभांश है।
वहीं, कृभको के उपाध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव ने आईएएनएस से कहा कि सहकारिता क्षेत्र को सरकार का पूरा सहयोग प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में अधिक लोग सहकारिता आंदोलन से जुड़ रहे हैं और संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने आगे बताया कि सहकारी संस्थाएं अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं और लाभ अर्जित कर रही हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस विकास का सीधा लाभ किसानों और सदस्य संस्थाओं तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन को अधिक प्रभावी बनाने और किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर करने के लिए निरंतर काम किया जा रहा है।
इसके अलावा, गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष शंकर चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नई बहु-राज्यीय सहकारी संस्थाओं के गठन से सहकारिता आंदोलन को नई ताकत मिली है।
शंकर चौधरी ने आगे कहा कि इन पहलों का असर आने वाले वर्षों में और स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। उन्होंने बताया कि उर्वरक, डेयरी, कृषि, चीनी उद्योग और बैंकिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहकारी संस्थाएं किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विशेष रूप से किसानों को कम ब्याज दर पर आसान ऋण उपलब्ध कराने के लिए भी बड़े स्तर पर प्रयास किए गए हैं।











