नागोया। गुलवीर सिंह का मानना ​​है कि एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल जीतने में छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने और अपनी पूरी टीम के सहयोग ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि बड़े स्तर पर अक्सर छोटी-छोटी बातें ही सबसे बड़ा फर्क डालती हैं।गुलवीर ने शुक्रवार को 25 लैप की दौड़ 28:29.38 में पूरी करके दूसरा स्थान हासिल किया। वह बहरीन के बिरहानु बालेव से सिर्फ 1.87 सेकंड पीछे रहे, जिन्होंने 28:27.51 में गोल्ड मेडल जीता। बहरीन के अल्बर्ट किप्टू ने 28:34.38 में ब्रॉन्ज मेडल जीता, जबकि चीन के वांग वेनजी 28:38.14 के समय के साथ चौथे स्थान पर रहे।

भारतीय एथलीट दौड़ के ज्यादातर समय तक लीड ग्रुप के साथ बने रहे और आखिर में संयम बनाए रखा। जब 2,000 मीटर की दौड़ बाकी थी, तब गुलवीर मेडल की दौड़ में मजबूती से बने हुए थे। उन्होंने हिम्मत बनाए रखी और बहरीन के दो धावकों के बीच जगह बनाते हुए सिल्वर मेडल पक्का किया।

इस नतीजे के साथ गुलवीर पुरुषों की 10 हजार मीटर दौड़ में दो एशियन गेम्स मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। उन्होंने पिछले एशियन गेम्स में जीते ब्रॉन्ज मेडल के साथ अब सिल्वर मेडल भी अपने नाम कर लिया है। पोडियम पर उनकी यह नई उपलब्धि पिछले एशियन गेम्स में उनके प्रदर्शन से बेहतर है।

गुलवीर ने कहा, "एशियन गेम्स में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतकर अच्छा लग रहा है। ऐसी चैंपियनशिप में पोडियम पर खड़ा होना संतोषजनक है। हमने टाइमिंग पर ध्यान देने के बजाय चैंपियनशिप रेस के हिसाब से तैयारी की थी, और मैं रेस प्लान पर टिके रहने में कामयाब रहा। यह मेडल हौसला बढ़ाने वाला है, लेकिन मुझे पता है कि अभी लंबा सफर तय करना है और आगे कई और रेस होनी हैं।"

भारतीय लॉन्ग-डिस्टेंस रनर ने बताया कि उनकी रणनीति घड़ी के खिलाफ दौड़ने के बजाय अपनी पोजीशन और संयम पर ध्यान केंद्रित करने की थी। उन्होंने कहा, “चैंपियनशिप रेस उन रेस से हमेशा अलग होती हैं जिनमें आप समय का पीछा कर रहे होते हैं। मेरा प्लान था कि शांत रहूं, लीड ग्रुप के साथ चलूं और सही समय पर अपनी चाल चलूं। मैंने उस रेस प्लान पर भरोसा किया जिस पर मैंने और मेरे कोच ने चर्चा की थी, पूरे समय धैर्य बनाए रखा और अच्छी बात यह रही कि यह काम कर गया।”

गुलवीर का 2026 का सीजन शानदार रहा है। उन्होंने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में 10,000 मीटर में सिल्वर और 5,000 मीटर में ब्रॉन्ज मेडल भी जीता है। गुलवीर ने अपनी तरक्की जारी रखने में मदद के लिए एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया और इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट से मिले सहयोग का श्रेय दिया। उन्होंने कहा, “हर साल मेरा मकसद बस थोड़ा और बेहतर करना होता है। मैं नतीजों के बारे में अधिक नहीं सोचता, क्योंकि वे तभी मिलते हैं जब तैयारी अच्छी हो। मेडल जीतना एक अच्छा नतीजा है। मगर मेरे लिए जरूरी बात यह है कि तरक्की जारी रहे।”

गुलवीर ने आगे कहा, “मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया का सहयोग मिल रहा है। उन्होंने ऐसा माहौल बनाया है जहां मैं पूरी तरह से ट्रेनिंग और रिकवरी पर ध्यान दे सकता हूं। मेरे कोच छोटी-छोटी बातों में सुधार करने में मेरी मदद करते हैं जिनसे फर्क पड़ता है। मैं इसी तरह काम करता रहूंगा और बेहतर करने की कोशिश करूंगा।”

गुलवीर ने सपोर्ट स्टाफ के योगदान पर भी जोर दिया और कहा कि उनके काम की वजह से एथलीट अपनी तैयारी और परफॉर्मेंस पर ध्यान दे पाते हैं। उन्होंने कहा, “इस स्तर पर अक्सर छोटी-छोटी चीजें ही सबसे बड़ा फर्क डालती हैं। कोच से लेकर फिजियोथेरेपिस्ट, स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग एक्सपर्ट और रिकवरी स्टाफ तक, सही लोगों का साथ होने से आप अपनी ट्रेनिंग पर पूरी तरह ध्यान दे पाते हैं। जब इन छोटी-छोटी बातों का लगातार ध्यान रखा जाता है, तो इससे रेस के दिन बेहतर परफॉर्मेंस करने में मदद मिलती है।”