बालाघाट, रितेश सोनी। किरनापुर थाना क्षेत्र में 15 सितंबर को हुए बलवाकांड की पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस के मुताबिक, थाने में हुए पथराव और तोड़फोड़ की घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि इसकी तैयारी तीन-चार दिन पहले से की जा रही थी। एसपी आदित्य मिश्रा के अनुसार, भीड़ जुटाने के साथ लोगों को पैसे बांटने और शराब परोसने के साक्ष्य भी जांच में मिले हैं। मामले में अब तक 63 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें से 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

डाकघर चोरी मामले के बाद बिगड़े हालात

किरनापुर में विवाद की शुरुआत डाकघर में रुपयों की चोरी के मामले से हुई थी। पुलिस जांच के दौरान कैलाश चौधरी और उनकी पत्नी सावित्री चौधरी को पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। दंपती ने पुलिस पर मारपीट के आरोप लगाए थे। इसके बाद मामले में पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। कार्रवाई के बाद समाज की ओर से 15 सितंबर को आंदोलन किया गया। आंदोलन के दौरान स्थिति बिगड़ गई और भीड़ का एक हिस्सा किरनापुर थाने पहुंच गया। यहां पुलिस पर पथराव करने के साथ थाने में तोड़फोड़ की गई। पुलिस ने बल प्रयोग और आंसू गैस का इस्तेमाल कर भीड़ को नियंत्रित किया।

शराब दुकानों से पेटियां उठाने का दावा

पुलिस के अनुसार, अब तक की जांच में सामने आया है कि बलवा करने के लिए भीड़ जुटाने और माहौल तैयार करने की कथित योजना पहले से बनाई गई थी। जांच में हिरीं, मुर्री, पानगांव, छोटा पानगांव और टेडवा की शराब दुकानों से बड़ी मात्रा में शराब लाकर बांटे जाने की बात सामने आई है। पुलिस का दावा है कि मुख्य आरोपी विकास डहाटे ने आंवलाझरी शराब दुकान से महेश टेकाम की पिकअप के जरिए करीब 15 से 20 पेटी शराब उठवाई और उसे अलग-अलग गांवों में पहुंचाया।

यूपीआई भुगतान और सीसीटीवी फुटेज की जांच

पुलिस के मुताबिक, शराब की खरीद के लिए फोन-पे और यूपीआई के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान किए जाने के साक्ष्य भी जांच में मिले हैं। घटना से पहले और बाद के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि फुटेज में कुछ लोगों की शराब दुकानों पर आवाजाही और शराब ले जाते हुए गतिविधियां दिखाई दी हैं। अब पुलिस ऑनलाइन लेनदेन, सीसीटीवी फुटेज, शराब की सप्लाई और आरोपियों के आपसी संपर्कों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।


पुलिस जांच का मुख्य फोकस इस बात का पता लगाने पर है कि कथित तौर पर पैसे और शराब की व्यवस्था किसने की, भीड़ जुटाने में किन लोगों की भूमिका रही और आंदोलन के दौरान भीड़ को थाने तक पहुंचाने की योजना किस स्तर पर तैयार की गई थी। मामले में फरार आरोपियों की तलाश के साथ पुलिस कथित साजिश की पूरी कड़ी सामने लाने का प्रयास कर रही है।