चेन्नई। 'वी द लीडर्स' के प्रमुख के. अन्नामलाई ने के. कामराज की जयंती पर उनको याद किया। उन्होंने बयान जारी कर कहा, "कामराज विरुधुनगर से थे और उन्हें उच्च शिक्षा हासिल करने का मौका नहीं मिला था। फिर भी, मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान कर्मवीर के. कामराज ने ही भारत के इतिहास में शिक्षा की सबसे मजबूत नींव रखी थी।"अन्नामलाई ने बयान में आगे कहा, "जब 1954 में कामराज मुख्यमंत्री बने, तो तमिलनाडु में सिर्फ 45 प्रतिशत बच्चे ही स्कूल जाते थे। 1963 में जब उन्होंने पद छोड़ा, तब तक यह आंकड़ा बढ़कर 80 प्रतिशत हो गया था।
कामराज के सत्ता में आने से पहले, स्कूलों में सिर्फ 3.33 लाख छात्र ही नामांकित थे। उनके कार्यकाल के अंत तक, स्कूल में नामांकन बढ़कर लगभग 9.46 लाख छात्र हो गया था।"
उन्होंने कहा, "आज का कोई भी मुख्यमंत्री डेटा के साथ ऐसी ठोस और प्रभावशाली उपलब्धियों के बारे में बात नहीं कर सकता। कर्मवीर के. कामराज का जन्म 1902 में हुआ था, अगर आज जीवित होते तो 124 साल के होते। उनका निधन 1975 में हुआ था। कामराज एक महान नेता थे जिन्होंने अपना जीवन तमिलनाडु के लोगों के लिए समर्पित कर दिया। उनका जन्म ऐसे समय में हुआ था जब देश में आजादी की चाहत अपने चरम पर थी।"
अन्नामलाई ने कहा, "जिस तरह उन्होंने नौ साल तक मुख्यमंत्री के तौर पर सेवा की, उसी तरह कामराज ने लगभग नौ साल जेल में भी बिताए। उन्हें महात्मा गांधी समेत कई बड़े नेताओं के साथ काम करने और उन्हें करीब से देखने का मौका मिला। 1920 से 1950 के दशक के दौरान, उन्होंने धीरे-धीरे खुद को भारत के प्रमुख जन-नेताओं में से एक के रूप में ढाला।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने 124वीं जयंती के अवसर पर के. कामराज को श्रद्धांजलि दी।




