श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (एलजी) मनोज सिन्हा ने गुरुवार को लोक भवन में एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें जेल विभाग के कामकाज की समीक्षा की गई।बैठक में जम्मू-कश्मीर भर में जेल की सुरक्षा और प्रबंधन प्रोटोकॉल को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की गई।

बैठक के दौरान, एलजी ने जेलों के कामकाज, सुरक्षा व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और कैदियों के कल्याणकारी उपायों की विस्तृत समीक्षा की।

उन्होंने अधिकारियों को सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत करने, कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने, और जेल प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने का निर्देश दिया।

एलजी ने प्रबंधन प्रक्रियाओं में सुधार, अनुशासन बनाए रखने, और नियमों के अनुसार कैदियों के साथ मानवीय व्यवहार करने तथा उनके पुनर्वास पर भी जोर दिया।

बैठक में जेल विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

जम्मू-कश्मीर जेल विभाग की जिम्मेदारी कैदियों को ऐसे माहौल में सुधारात्मक सेवाएं प्रदान करना है, जो उनके सुधार के लिए अनुकूल हो।

वर्तमान में, 14 जेलें काम कर रही हैं, जिनमें दो केंद्रीय जेलें, 10 जिला जेलें, एक विशेष जेल और एक उप-जेल शामिल हैं।

3,629 कैदियों की क्षमता के मुकाबले, विभाग अभी 5,300 से अधिक कैदियों को रखे हुए है।

इसके अलावा, विभाग के पास मिश्रीवाला में एक प्रशिक्षण केंद्र - 'इंस्टीट्यूट ऑफ करेक्शनल सर्विसेज' है, जो जेल प्रबंधन (बुनियादी प्रशिक्षण और रिफ्रेशर कोर्स) से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान करता है। साथ ही, विभाग के नियंत्रण में एक 'होल्डिंग सेंटर' भी है।

हाल ही में, केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में जेलों के पर्यवेक्षण और प्रबंधन के लिए 'जेल मैनुअल, 2022' को अधिसूचित किया है।

नया जेल मैनुअल 'मॉडल जेल मैनुअल' की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य अपराधियों को सुधारात्मक और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करना है, ताकि वे समाज में वापस लौट सकें और एक सुरक्षित व मानवीय संस्था के माध्यम से समाज में अपना योगदान दे सकें। इससे सार्वजनिक सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।