मुंबई। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि भारत और अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं और इस संबंध में जल्द घोषणा की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि समझौते से जुड़े कुछ मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।

मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रुबियो ने कहा, “हम समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। मेरा कहना है कि समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले जितना करीब पहुंचा जा सकता है, हम उतने करीब हैं।”

उन्होंने कहा कि कुछ ही मुद्दे बाकी हैं, जिन्हें अंतिम रूप दिया जाना है। रुबियो ने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस संबंध में घोषणा होगी और इसके बाद समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी विदेश विभाग सीधे तौर पर व्यापार समझौतों पर बातचीत नहीं करता, लेकिन इस संबंध में चल रही चर्चाओं में उसकी करीबी भागीदारी है। उन्होंने कहा कि वह और उनके समकक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार इस समझौते को लेकर काफी गंभीर हैं।

इस महीने की शुरुआत में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत को व्यापार समझौते के पहले चरण को जल्द अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी कहा था कि भारत प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिकी बाजार में तरजीही पहुंच और शुल्क व्यवस्था में अधिक स्थिरता चाहता है।

इससे पहले, रुबियो ने मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने जयशंकर के साथ ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर चर्चा की तथा भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के महत्व को दोहराया।

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम सहित क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। रुबियो ने कहा कि अमेरिका के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ने से भारत को अपनी आपूर्ति शृंखला में विविधता लाने और घरेलू उपभोक्ताओं की बड़ी मांग पूरी करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग में हाल में हुई प्रगति की भी सराहना की। उन्होंने दोनों देशों की सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी प्रौद्योगिकियों और रक्षा प्रणालियों की खरीद बढ़ाने की भी वकालत की।