छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के पांढुर्णा में शुक्रवार को विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक ‘गोटमार मेला’ परंपरागत उग्रता और भारी पत्थरबाजी के बीच शुरू हुआ। जाम नदी के बीचों-बीच गड़े पलाश के झंडे को हासिल करने के लिए पांढुर्णा और सावरगांव के हजारों ग्रामीण आमने-सामने आ गए और दोनों ओर से पत्थरों की ताबड़तोड़ बौछार शुरू हो गई। इस भीषण टकराव में अब तक 650 से अधिक लोग लहूलुहान होकर घायल हो चुके हैं। पत्थर लगने से दर्जनों लोगों के सिर और चेहरे बुरी तरह चोटिल हुए हैं, जिनमें से 4 घायलों की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है।


कांग्रेस विधायक नीलेश उईके ने भी की पत्थरबाजी, आस्था की परंपरा बताया

मेले के दौरान पांढुर्णा के स्थानीय कांग्रेस विधायक नीलेश उईके भी भीड़ के बीच पहुंचे और उन्होंने भी परंपरा का निर्वहन करते हुए नदी के दूसरे छोर की ओर पत्थर बरसाए। विधायक ने इसे क्षेत्र की सदियों पुरानी ऐतिहासिक परंपरा और आस्था का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह पीढ़ियों से चला आ रहा जन-उत्साह है, जिसे स्थानीय लोग पूरी निष्ठा से निभाते हैं।


आपातकालीन चिकित्सा और सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त

घायलों की भारी संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने ग्राउंड जीरो पर व्यापक मोर्चा संभाला: कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ के अनुसार, मेला परिसर में त्वरित उपचार के लिए 7 अस्थाई फील्ड हॉस्पिटल बनाए गए हैं, जहां 44 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे तैनात है। गंभीर रूप से घायल लोगों को तत्काल प्राथमिक उपचार देकर उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए 22 एंबुलेंस लगातार फेरे लगा रही हैं। समूचे घटनाक्रम और भीड़ के मिजाज पर 3 विशेष ड्रोन कैमरों और 10 हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों से लगातार नजर रखी जा रही है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति को बेकाबू होने से रोकने के लिए 650 से ज्यादा पुलिस अधिकारी और जवान मेला क्षेत्र में मोर्चा संभाले हुए हैं।


जानलेवा इतिहास के बावजूद बरकरार है जुनून

गोटमार मेले का इतिहास जितना प्राचीन है, उतना ही खूनी भी रहा है। बीते दशकों में इस परंपरा की भेंट चढ़कर कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि हर साल सैकड़ों लोग गंभीर रूप से अपंग और घायल होते हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक समझाइशों और सुरक्षा बंदोबस्तों के बीच दोनों पक्षों के ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर इस पारंपरिक रस्म को अंजाम देने के लिए नदी किनारे डटे हुए हैं। कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ ने बताया कि परंपरा के आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने सभी एहतियाती इंतजाम पूरे कर लिए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति पर तुरंत काबू पाया जा सके।