भोपाल। राजधानी भोपाल में 30 सितंबर को रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की सनसनीखेज हत्या करने का मुख्य आरोपी नौकर वरुण कुमार 13 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। हालांकि, जांच में जुटी एसआईटी और पुलिस को भोपाल रेलवे स्टेशन के महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज हाथ लगे हैं, जिसमें आरोपी की संदिग्ध गतिविधियां कैद हुई हैं। वारदात के बाद 30 सितंबर के तड़के 3:51 बजे वरुण कुमार भोपाल रेलवे स्टेशन परिसर में घूमता हुआ दिखाई दिया है। पुलिस अब रेलवे स्टेशन के फुटेज और ट्रेनों के समय का मिलान कर उसकी फरारी के सटीक रूट का पता लगाने में जुटी है।
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी की उनके ही घर में बेरहमी से गला रेतकर हत्या करने के आरोपी वरुण की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने चार राज्यों में जाल बिछा रखा है। मध्य प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में पुलिस की टीमें लगातार उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। आगरा से वृंदावन जाने वाले मार्ग पर 80 से ज्यादा स्थानों पर आरोपी वरुण के पोस्टर चस्पा किए गए हैं। पुलिस अब तक उसके 100 से ज्यादा रिश्तेदारों, परिचितों और दोस्तों से पूछताछ कर चुकी है। वरुण के पिता ग्वालियर में, बहन पटियाला में तथा उसके कुछ करीबी दोस्त आगरा और मथुरा में रहते हैं। पुलिस इन सभी से 3 से 4 बार पूछताछ कर चुकी है, लेकिन अब तक किसी भी परिजन या दोस्त की फरारी में संलिप्तता का ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।
पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि आरोपी वरुण कुमार को घटना से महज तीन दिन पहले, 27 सितंबर को 'वर्मा होम हेल्थ केयर' नामक प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए केयरटेकर के रूप में रिटायर्ड आईएएस के घर तैनात किया गया था। पुलिस ने एजेंसी से उसके सभी दस्तावेज, पूर्व कार्य अनुभव और वेरिफिकेशन रिकॉर्ड जब्त किए हैं। एजेंसी के रिकॉर्ड में पंजाब के पटियाला एसपी कार्यालय से 1 मई 2025 को जारी उसका चरित्र प्रमाण पत्र (Character Certificate) भी मिला है, जिसमें उसका रिकॉर्ड साफ और अपराधमुक्त दर्शाया गया था। बावजूद इसके, उसने घर में घुसने के तीसरे दिन ही खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया। फिलहाल पुलिस साइबर सेल और तकनीकी साक्ष्यों के जरिए आरोपी की घेराबंदी करने में जुटी है।













