शहडोल। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में जालसाजी और प्रशासनिक लापरवाही का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे सरकारी सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। शहडोल जिले के जयसिंहनगर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले उफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ तथाकथित डॉक्टर महेश चंद शर्मा के रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद जांच में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह तथाकथित डॉक्टर एक ही समय में प्रदेश के तीन अलग-अलग जिलों में समानांतर रूप से नौकरी कर रहा था और तीनों ही जगहों से नियमित वेतन उठा रहा था। शुरुआती जांच के मुताबिक, वह अब तक सरकार को करीब 64 लाख रुपये की चपत लगा चुका है।
तीन अलग-अलग जिलों में तीन पहचान: एनएचएम का सिस्टम रहा पूरी तरह फेल
जांच में यह बात प्रमाणित हुई है कि आरोपी महेश चंद शर्मा मध्य प्रदेश के शहडोल, खरगोन और श्योपुर जिलों में एक साथ पदस्थ था। इस महाफर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए उसने बेहद शातिराना तरीके से प्रत्येक जिले में अलग-अलग दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियां हासिल की थीं। स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की नाक के नीचे वर्षों तक यह खेल चलता रहा, लेकिन विभाग की सत्यापन प्रणाली इसे पकड़ने में पूरी तरह नाकाम रही।
तीनों जिलों में उसकी नियुक्ति और दर्ज दस्तावेजों का विवरण इस प्रकार है:
- श्योपुर जिला: यहाँ उसकी ज्वाइनिंग 1 जून 2021 को हुई थी। श्योपुर में उसकी एनएचएम एम्प्लॉई आईडी 281676 और पैन नंबर OETPS 6180 E दर्ज था। यहाँ से उसने लगभग 30 लाख रुपये का मानदेय प्राप्त किया।
- खरगोन जिला: इस जिले में उसने 14 फरवरी 2023 को ज्वाइनिंग ली। यहाँ उसकी एम्प्लॉई आईडी 326860 और पैन नंबर IBAPM 7895 G रिकॉर्ड में दर्ज था। खरगोन से उसने करीब 20 लाख रुपये का वेतन आहरित किया।
- शहडोल जिला: यहाँ उसकी ज्वाइनिंग सबसे नवीनतम यानी 9 फरवरी 2024 को हुई थी। शहडोल में उसकी एम्प्लॉई आईडी 331906 और पैन नंबर CYWPC 6248 L दर्ज था। शहडोल से उसने लगभग 14 लाख रुपये उठाए। सबसे बड़ा प्रशासनिक सवाल यह खड़ा हो रहा है कि शहडोल में संदिग्ध दस्तावेजी विवरण होने के बावजूद किस स्तर पर अधिकारियों ने बिना बारीकी से जांच किए उसे ज्वाइनिंग दे दी।
'सार्थक ऐप' का दुरुपयोग: घर बैठे लगती रही ऑनलाइन हाजिरी
विभागीय सूत्रों और स्थानीय स्टाफ से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी डॉक्टर उफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शायद ही कभी अपनी सेवाएं देने पहुंचता था। उसने सरकारी हाजिरी तंत्र की कमियों का फायदा उठाते हुए 'सार्थक ऐप' (Sarthak App) के माध्यम से जिले की सीमा, और कई बार तो मध्य प्रदेश की भौगोलिक सीमा से बाहर रहते हुए भी अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करा दी। ऐसा नहीं है कि जिला प्रशासन को इसकी भनक नहीं थी; ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा किए गए औचक निरीक्षणों में वह कई बार अपने कर्तव्य से नदारद पाया गया था। अनुपस्थिति पकड़े जाने पर उसे औपचारिक प्रशासनिक नोटिस भी थमाए गए, लेकिन इसके बावजूद उसके रसूख या सिस्टम की ढिलाई के चलते उसके खिलाफ समय रहते कोई ठोस या प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, जिसका फायदा उठाकर वह प्रतिमाह 50 से 55 हजार रुपये प्रति जिला (कुल मिलाकर करीब 1.5 लाख रुपये महीना) वेतन डकारता रहा।
स्वास्थ्य मंत्री का कड़ा रुख: सेवा समाप्ति, एफआईआर और पाई-पाई की वसूली होगी
इस गंभीर वित्तीय अनियमितता और जालसाजी का मामला उजागर होते ही शासन स्तर पर हड़कंप मच गया है। शहडोल प्रवास के दौरान प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने दो टूक शब्दों में कहा है कि:
"आरोपी फर्जी डॉक्टर की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उसके खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी की संगीन धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी और अब तक उसके द्वारा शासकीय कोष से लिए गए पूरे 64 लाख रुपये के वेतन की वसूली भू-राजस्व की बकाया राशि की तरह कड़ाई से की जाएगी।" इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में केवल डॉक्टर ही दोषी नहीं है, बल्कि विभाग के उन जिम्मेदार अधिकारियों और बाबूओं की भूमिका की भी उच्च स्तरीय जांच होगी जिन्होंने दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन किए बिना उसे ज्वाइनिंग दी, उसकी संदिग्ध ऑनलाइन उपस्थिति पर नजर नहीं रखी और इतनी बड़ी गड़बड़ी को दबाए रखा। लापरवाही बरतने वाले ऐसे अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।




