नई दिल्ली । दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, यह राष्ट्रीय राजधानी के सबसे बड़े घोटालों में से एक है। वैज्ञानिक जांच की गई और साजिश के हर पहलू को साबित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह भ्रष्टाचार का स्पष्ट मामला है। रिश्वत देने, लेने, स्वीकार करने और इस्तेमाल करने का स्पष्ट मामला है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हवाला के माध्यम से और कई किश्तों में पैसा ट्रांसफर किया गया था। सभी प्रमुख गवाहों से मजिस्ट्रेट के सामने पूछताछ की गई और 164 के तहत बयान दर्ज किए गए। मामले में ऐसे गवाह हैं जो स्पष्ट रूप से बताते हैं कि साजिश कैसे रची गई, रिश्वत कैसे दी गई और किसे दी गई। उन्होंने कहा कि हमारे पास ईमेल और व्हाट्सएप चैट हैं। यह कोई मनगढ़ंत बात नहीं है।
तुषार मेहता ने कहा कि एएसजी ने ट्रायल कोर्ट के सामने 10 दिनों तक बहस की। कुछ ही दिनों में फैसला आ गया। तेजी से न्याय एक लक्ष्य है लेकिन इसका परिणाम न्याय की विफलता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब हम साजिश का आरोप लगाते हैं, तो हमें हर हिस्से को साबित करना होता है। ट्रायल में इसे साजिश बताने के लिए सभी हिस्सों को जोड़ना पड़ता है। साजिश कभी भी खुलेआम नहीं रची जाती। डिस्चार्ज ऑर्डर में भी इस पर यकीन नहीं किया जाता।
उन्होंने कहा कि गवाहों के बयान और होटल के रिकॉर्ड मौजूद हैं और इनकी जांच मुकदमे की सुनवाई के दौरान की जानी चाहिए, न कि आरोप तय किए जाने के चरण में। तुषार मेहता ने कहा हमने साक्ष्य नष्ट करने के कई मामले दिखाए है, 170 फोन नष्ट कर दिए गए, हमने जो साक्ष्य जुटाए थे, उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उन सभी नोटों पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला है जो आरोपियों के मोबाइल फोन में मिले थे। डिस्चार्ज ऑर्डर में अप्रूवर के 164 स्टेटमेंट को नज़रअंदाज़ किया गया, जबकि यह तय कानून है कि चार्ज के स्टेज पर अप्रूवर के स्टेटमेंट का काफी महत्व होता है।
बता दें कि दिल्ली की राऊज एवेन्यू अदालत ने 27 फरवरी को आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनके करीबी सहयोगी मनीष सिसोदिया को आबकारी नीति मामले में 23 अन्य लोगों के साथ बरी कर दिया था। इस मामले को शराब नीति घोटाला भी कहा जाता है।
केजरीवाल और सिसोदिया को महीनों जेल में रहने के बाद बरी कर दिया गया था। कोर्ट से बरी होने पर आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। अरविंद केजरीवाल का आरोप था कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए भाजपा ने उनके खिलाफ साजिश रची थी।
केजरीवाल, सिसोदिया को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर हुई सुनवाई
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Saurabh Shukla
1 अक्टूबर 2026, 10:19 pm IST
Saurabh Shukla1 अक्टूबर 2026, 10:19 pm IST
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