नई दिल्ली। भारतीय महिला हॉकी टीम लगातार वैश्विक मंचों पर अपना दबदबा साबित कर रही है। इसमें गुरजीत कौर जैसी बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का अहम योगदान रहा है। गुरजीत अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक जीतने वाली भारतीय टीमों का हिस्सा रही हैं। उन्होंने भारतीय टीम को पहली बार ओलंपिक सेमीफाइनल में पहुंचाने में मदद की थी।
गुरजीत कौर का जन्म 25 अक्टूबर 1995 को मियादी कलां, अमृतसर, पंजाब में हुआ था। उनका जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। उनकी एक बड़ी बहन है, प्रदीप कौर। गुरजीत के पिता सतनाम सिंह ने अपनी बेटियों को बेहतर शिक्षा के लिए 70 किलोमीटर दूर पंजाब के तरनतारन जिले के कैरों में एक बोर्डिंग स्कूल में भेजने का फैसला किया।
कैरों महिलाओं की सबसे पुरानी और सबसे मशहूर हॉकी नर्सरियों में से एक थी, और यहीं पर दोनों बहनों को इस खेल के लिए अपने जुनून का पता चला। हॉकी में उनके बेहतरीन खेल की वजह से उन्हें स्कूल के सरकारी विंग में जगह मिली, जहां उन्हें मुफ्त पढ़ाई और खाना मिलता था, जिससे बहनों के पैसे की तंगी से जूझ रहे माता-पिता को राहत मिली।
गुरजीत कौर ने 2011 तक कैरन में अपनी पढ़ाई जारी रखी, जिसके बाद वह अपनी पढ़ाई और ट्रेनिंग जारी रखने के लिए जालंधर के लायलपुर खालसा कॉलेज फॉर विमेन चली गईं – यहीं से वह ड्रैग-फ्लिकिंग को लेकर सीरियस हुईं। इसके बाद, उन्हें इलाहाबाद में इंडियन रेलवे में जूनियर क्लर्क के तौर पर नौकरी मिल गई।
घरेलू स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद गुरजीत को 2014 में भारतीय टीम में खेलने का मौका मिला। इसके बाद से वह टीम का हिस्सा रही हैं। वह डिफेंडर के तौर पर खेलती हैं। साथ ही ड्रैग फ्लिकर भी हैं। भारत के लिए वह 137 मैचों में 86 गोल कर चुकी हैं।
गुरजीत कौर जकार्ता में 2018 में आयोजित एशियन गेम्स में सिल्वर जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहीं हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में गुरजीत कौर ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली टीम का हिस्सा थीं। वह 2018 में एशिया कप में गोल्ड और 2022 एशिया कप में ब्रॉन्ज जीतने वाली टीम का भी हिस्सा रही हैं।
गुरजीत 2018 एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में सिल्वर, 2022 में स्पेन में एफआईएच नेशन कप में गोल्ड और 2016 में गुवाहाटी में आयोजित दक्षिण एशियाई गेम्स में गोल्ड जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रही हैं।
गुरजीत कौर ने 2020 के समर ओलंपिक (टोक्यो) में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एकमात्र गोल करके भारत को पहली बार ओलंपिक महिला हॉकी के सेमीफाइनल में पहुंचने में मदद की थी।
31 साल की होने जा रही गुरजीत अभी भी एक खिलाड़ी के तौर पर सक्रिय हैं और युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ी रोल मॉडल के तौर पर उभरी हैं।
















