भोपाल, जीतेन्द्र यादव। मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण का मामला एक बार फिर राज्य की राजनीति और न्यायपालिका के केंद्र में आ गया है। हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में वरिष्ठ विधिक विशेषज्ञों के साथ हाई-लेवल मीटिंग की।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता करेंगे सरकार की पैरवी

दिल्ली दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मुलाकात की। इस बैठक में मध्य प्रदेश के एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह भी शामिल हुए। सरकार की योजना हाईकोर्ट के आदेश पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक (स्टे) मांगने की है। सुप्रीम कोर्ट में दायर होने वाली पुनर्विचार याचिका और अंतरिम राहत की अर्जी पर सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ही पैरवी करेंगे।

दो प्रमुख बिंदुओं पर मंथन, IAS अजय कटेसरिया सौंपेंगे तथ्य और आंकड़े

बैठक के दौरान सुप्रीम कोर्ट में रखे जाने वाले मुख्य तर्कों और दो प्रमुख बिंदुओं पर विस्तार से रणनीति तैयार की गई। याचिका को तथ्यपरक और मजबूत बनाने के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अजय कटेसरिया को सभी आवश्यक आंकड़े और प्रशासनिक दस्तावेज तैयार कर प्रस्तुत करने का जिम्मा सौंपा गया है।

13 फीसदी होल्ड पदों पर भर्ती की समय-सीमा का मामला

दरअसल, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर तीन महीने के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार इस समय-सीमा और उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पुनर्विचार याचिका दाखिल कर रही है, ताकि मामले में विधिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।