बांदा। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लंबित भुगतान, गौशालाओं में चारे-दवा का संकट, राजस्व विभाग की हीलाहवाली और पुलिस की कथित एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ अखिल भारतीय प्रधान संगठन के बैनर तले बांदा प्रशासक संघ ने शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को संघ के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी (DM) और कमिश्नर (आयुक्त) को पांच सूत्रीय संयुक्त ज्ञापन सौंपा।
प्रशासक संघ द्वारा उठाए गए 5 प्रमुख मुद्दे:
लंबित भुगतान और कथित भ्रष्टाचार: संघ के जिलाध्यक्ष एवं ग्राम पंचायत गलौली के प्रशासक बृजेन्द्र सिंह गौतम ने आरोप लगाया कि पंचायतों में पुराने सत्रों की मजदूरी, सामग्री आपूर्ति (सप्लाई), स्वच्छ भारत मिशन (SBM), सामुदायिक शौचालय और विधायक-सांसद निधि के भुगतान महीनों से अटके हैं। आरोप है कि पंचायत सचिवों द्वारा भुगतान के नाम पर कथित रूप से अनावश्यक परेशान किया जा रहा है, जिससे मजदूरों व सप्लायरों के सामने आर्थिक संकट है।
गौशालाओं में भूसा, चारा और दवा का संकट: अस्थायी व स्थायी गौशालाओं में भरण-पोषण की राशि समय पर न मिलने से बदहाली की स्थिति है। गलौली समेत कई गौशालाओं में क्षमता से अधिक गोवंश होने और पुराने भुगतान लंबित रहने के कारण चारे और दवाओं की भारी किल्लत हो गई है।
राजस्व विभाग की लापरवाही से बढ़ रहे भूमि विवाद: कानाखेड़ा के प्रशासक विन्देश कुमार ने कहा कि पट्टा, पैमाइश, अतिक्रमण और सार्वजनिक भूमि से जुड़ी फाइलें तहसीलों में 6-6 महीने से धूल फांक रही हैं। पैमाइश न होने से गांवों में जमीन को लेकर आपसी रंजिश, मारपीट और मुकदमेबाजी बढ़ रही है।
कर्मचारियों के तबादले में मनमानी: पंचायतों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण में मनमाने रवैये से विकास कार्य ठप पड़े हैं।
पुलिस की एकतरफा कार्रवाई का आरोप: प्रशासकों ने आरोप लगाया कि ग्रामीण विवादों में तथ्यों की निष्पक्ष जांच किए बिना पुलिस द्वारा सीधे प्रधानों और प्रशासकों को नोटिस जारी करने या प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने जैसी कार्रवाई की जा रही है।
7 दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी
जिलाध्यक्ष बृजेन्द्र सिंह गौतम ने स्पष्ट किया कि यदि 7 दिनों के भीतर प्रशासन संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर समस्याओं का निस्तारण नहीं करता है, तो पूरा संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान बृजेन्द्र सिंह गौतम (गलौली), विन्देश कुमार (कानाखेड़ा), उजैर खान (को अदरी), मूलचन्द्र निषाद (झंझरी), रोहित (तेरा ब), जयकरण यादव (तांगामऊ), हरिश्चंद्र (पड़ेरी), अशोक कुमार (चिल्ली), आरबी यादव (टोलाकाजी), आशा (पचनेही), रामऔतार (डिंगवाही) और रमाकांत शुक्ला (जमालपुर) सहित भारी संख्या में प्रशासक मौजूद रहे।




