रहली, आशु दुबे । जिले के रहली थाना पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। एक 21 वर्षीय युवती ने आरोप लगाया है कि अश्लील फोटो-वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करने, घर में घुसकर धमकाने और बदनाम करने की शिकायत लेकर वह अपने परिजनों के साथ रहली थाने पहुंची, लेकिन करीब छह घंटे तक इंतजार कराने के बावजूद उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इतना ही नहीं, पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने उसका लिखित आवेदन तक लेने से इंकार कर दिया।


जानकारी के अनुसार रहली थाना क्षेत्र के रामपुर गांव निवासी पीड़िता ने आरोप लगाया है कि गांव का एक युवक पिछले छह माह से अश्लील फोटो और वीडियो दिखाकर उस पर मिलने का दबाव बना रहा है। विरोध करने पर आरोपी द्वारा बदनाम करने की धमकी दी जा रही है। पीड़िता का यह भी आरोप है कि आरोपी नशे की हालत में उसके घर में घुस आया था, जिससे परिवार दहशत में है।


पीड़िता अपने परिजनों के साथ लिखित शिकायत लेकर रहली थाने पहुंची, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने आवेदन लेने से ही मना कर दिया। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने यह कहकर कार्रवाई टाल दी कि "साहब नहीं हैं, आदेश नहीं है।" इसके बाद पीड़िता और उसके परिजनों को तस्दीक के नाम पर लगभग छह घंटे तक थाने में बैठाए रखा, लेकिन न तो शिकायत दर्ज की गई और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई।


निराश होकर पीड़िता और उसका परिवार बिना कार्रवाई के वापस लौट गया। अब परिवार ने मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक (एसपी) सागर से करने का निर्णय लिया है और निष्पक्ष जांच के साथ आरोपी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।


यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। संवेदनशील मामलों में समय पर शिकायत दर्ज कर कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी है। यदि ऐसे मामलों में लापरवाही बरती जाती है तो पीड़ित की सुरक्षा के साथ-साथ भविष्य में किसी बड़ी घटना की आशंका भी बढ़ सकती है। अब देखना होगा कि वरिष्ठ अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर संबंधित पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करते हैं या नहीं।