सोहागपुर। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (Satpura Tiger Reserve) के चूरना परिक्षेत्र से एक दुखद खबर सामने आई है। यहाँ वन विभाग की करीब 46 वर्षीय विभागीय मादा हाथी ‘स्मिता’ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। स्मिता का शव मल्लूपुरा बीट में पाया गया, जिसके शरीर पर कई जगह चोट के गंभीर निशान मिले हैं। शुरुआती जांच के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि नर हाथी ‘कृष्णा’ के साथ हुए आपसी संघर्ष के दौरान घायल होने से उसकी मौत हुई होगी। हालांकि, वन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मौत की वास्तविक और वैज्ञानिक वजह प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।


10 अगस्त को दिखे थे चोट के निशान, शाम को बिगड़ी हालत

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक व जनसंपर्क अधिकारी आशीष खोबरागड़े ने बताया कि 9 अगस्त की रात विभागीय हाथियों को चूरना परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 190 स्थित जंगल में छोड़ा गया था। 10 अगस्त को जब हाथी वापस लौटे, तब स्मिता के शरीर पर चोट के निशान देखे गए। वन विभाग की टीम ने तुरंत उसका प्राथमिक उपचार शुरू किया, जिसके बाद वह सामान्य रूप से चलने-फिरने लगी थी। हालांकि, उसी दिन शाम करीब 4 बजे उसकी स्थिति अचानक बिगड़ी और वह ज़मीन पर गिर पड़ी, जिसके बाद डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।


नर हाथी 'कृष्णा' से भिड़ंत की आशंका क्यों?

प्रारंभिक जांच में स्मिता की चोटों को नर हाथी ‘कृष्णा’ के साथ हुई भिड़ंत से जोड़कर देखा जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, कर्नाटक से लाए गए नर हाथी कृष्णा का स्वभाव काफी आक्रामक है और हाल ही में उसकी एक अन्य हाथी के साथ भी झड़प हुई थी। हालांकि, वन विभाग इस निष्कर्ष की अंतिम पुष्टि पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आने के बाद ही करने की बात कह रहा है।


6 घंटे चला पोस्टमार्टम, सैंपल लैब भेजे गए

मंगलवार को वरिष्ठ वन अधिकारियों, एनटीसीए (NTCA) के प्रतिनिधियों और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों डॉ. गुरुदत्त शर्मा एवं डॉ. प्रशांत देशमुख की देखरेख में लगभग 6 घंटे तक स्मिता का विस्तृत पोस्टमार्टम किया गया। जांच के दौरान शरीर से वैज्ञानिक नमूने (Samples) एकत्र किए गए हैं, जिन्हें सटीक कारण का पता लगाने के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा।


चार दशकों तक गश्ती अभियानों की शान रही 'स्मिता' को नम आंखों से विदाई

करीब चार दशकों से वन विभाग के साथ काम कर रही स्मिता केवल एक विभागीय हाथी नहीं, बल्कि चूरना और मढ़ई क्षेत्र की पहचान बन चुकी थी। सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर लाखन पटेल के अनुसार, स्मिता बेहद शांत और सीधे स्वभाव की हथनी थी, जिसने दर्जनों बाघ गश्ती अभियानों और वन्यजीव संरक्षण कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात मुख्य वन संरक्षक (नर्मदापुरम) अशोक कुमार सिंह और उप संचालक ऋषिभा सिंह नेताम सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने पुष्पमाला अर्पित कर स्मिता को अंतिम श्रद्धांजलि दी। तत्पश्चात निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत उसका भस्मीकरण किया गया।