नई दिल्ली। दिल्ली में प्रस्तावित किसान आंदोलन से पहले किसान संगठनों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन हरियाणा सरकार से टकराव के लिए नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में है। फतेहगढ़ साहिब में किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि किसानों को शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाकर अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक अधिकार मिलना चाहिए। वहीं, भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने हरिद्वार में छात्रों के आंदोलन, कांवड़ यात्रा, वन गुज्जरों के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सरकार की आलोचना की।किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि 'देश बचाओ मोर्चा' के बैनर तले सैकड़ों वाहनों के साथ किसान दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं। पंजाब के अलग-अलग जिलों से किसान फतेहगढ़ साहिब में एकत्र हुए, जहां से आगे की रणनीति बनाई जा रही है। उनका उद्देश्य केवल चार घंटे के लिए दिल्ली स्थित किसान घाट पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना और अपनी बात सरकार तक पहुंचाकर वापस लौटना है। लेकिन, शंभू बॉर्डर पर किसानों को रोकने और रास्ते बंद करने की खबरें मिल रही हैं। यदि किसानों को रातभर रास्तों पर रोका गया और उन्हें परेशानी हुई तो इसकी जिम्मेदारी हरियाणा की सैनी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार की होगी।
सरवन सिंह पंधेर ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों से बातचीत करने या भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का पूरा मसौदा देश के सामने रखने के बजाय दमनात्मक रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि सुबह किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी समेत कई किसानों को गिरफ्तार किया गया। इससे यह साफ हो गया है कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाना चाहती है।
पंधेर ने दावा किया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता देश और किसानों के हित में नहीं है। अमेरिका के बड़े कृषि उत्पादकों के मुकाबले भारतीय छोटे और मध्यम किसान प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे, जिससे किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने आगे कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री लगातार पंजाब आते हैं और अपनी राजनीतिक गतिविधियां करते हैं, लेकिन जब पंजाब के किसान देश की राजधानी दिल्ली जाकर अपनी बात रखना चाहते हैं तो उन्हें रास्ते में रोक दिया जाता है। केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या पंजाब भी देश का हिस्सा है या नहीं। उनका कहना था कि किसानों को केवल हरियाणा की सड़क का उपयोग करते हुए दिल्ली पहुंचना था और वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना था।
शंभू बॉर्डर पर रोक लगाए जाने की संभावना पर सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि किसान किसी भी प्रकार का टकराव नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि मौके पर जो परिस्थितियां होंगी, उसी के अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।
वहीं, हरिद्वार में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार की आलोचना की। दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज पर उन्होंने कहा कि जब भी आंदोलन तेज होगा, तब ऐसी घटनाएं सामने आएंगी। आंदोलनकारियों पर पहले भी लाठीचार्ज होते रहे हैं। लाठीचार्ज हमेशा उन लोगों पर होता है जो अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हैं, जबकि सत्ता का समर्थन करने वालों पर ऐसी कार्रवाई नहीं होती। यदि सरकार तानाशाही रवैया अपनाए तो अधिकारों की लड़ाई आंदोलन के माध्यम से ही लड़ी जाती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया है।
चुनावों और आंदोलनों पर टिप्पणी करते हुए टिकैत ने आरोप लगाया कि सरकार चुनावों में भी गड़बड़ी कर सकती है। उन्होंने कहा कि यदि शासन संवेदनशील हो तो भूख हड़ताल असर करती है, लेकिन यदि सरकार तानाशाही रवैया अपनाए तो अधिकारों की लड़ाई आंदोलन के माध्यम से ही लड़ी जाती है।
कांवड़ यात्रा और आगामी धार्मिक आयोजनों को लेकर टिकैत ने कहा कि हरिद्वार देश का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि कांवड़ यात्रियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और अनावश्यक धक्का-मुक्की से बचा जाए। आगामी कुंभ मेले की तैयारियां भी बेहतर ढंग से की जानी चाहिए ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
'वंदे मातरम' बिल को लेकर पूछे जाने पर राकेश टिकैत ने कहा कि यदि सरकार इस विषय में कोई कानून लाना चाहती है तो वह उसका निर्णय है। जो व्यक्ति देश में रहता है, वह 'वंदे मातरम' बोले, इसमें उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।




