श्योपुर, उत्तम सिंह। पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के दावों के बीच श्योपुर वन मंडल की खाड़ी रेंज से वन भूमि पर कथित अतिक्रमण और डंपिंग का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार, खाड़ी रेंज अंतर्गत ओछापुरा–श्यामपुर मार्ग पर करीब आठ माह पूर्व एक निर्माण कंपनी द्वारा आरक्षित वन भूमि में बिटुमिनस (डामर) मटेरियल डंप किया गया था। मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में भी की गई, लेकिन अब तक वन अपराध प्रकरण (POR) दर्ज नहीं होने से विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।


शिकायत के निराकरण में वन विभाग ने स्वीकार किया कि वन क्षेत्र में बिटुमिनस मटेरियल का ढेर पाया गया था। विभाग का कहना है कि संबंधित संस्था को समझाइश देकर सामग्री हटवाकर एनएच-52 की सीमा क्षेत्र में रखवा दी गई है। वहीं शिकायतकर्ता का दावा है कि आज भी कई स्थानों पर बिटुमिनस मटेरियल वन भूमि की सीमा के आसपास पड़ा हुआ है, जिससे वन क्षेत्र प्रभावित हो रहा है।


मानसून के दौरान इस मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार बिटुमिनस मटेरियल में मौजूद कुछ रासायनिक तत्व वर्षा के पानी के साथ मिट्टी और जल स्रोतों तक पहुंच सकते हैं, जिससे वन क्षेत्र और वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।


मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि वन विभाग द्वारा वन क्षेत्र में मटेरियल मिलने की पुष्टि किए जाने के बावजूद करीब आठ माह बाद भी वन अपराध प्रकरण दर्ज क्यों नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ने विभाग के उस स्पष्टीकरण पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें डंपिंग को मजदूरों द्वारा "भूलवश" किया जाना बताया गया है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में बिटुमिनस मटेरियल का आरक्षित वन भूमि तक पहुंचना सामान्य भूल नहीं माना जा सकता और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।


इस संबंध में मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) लवित भारती ने कहा कि मामले की जांच के लिए टीम भेजी गई थी और कार्रवाई के लिए डीएफओ को पत्र लिखा गया है। उन्होंने कहा कि किस स्तर पर लापरवाही हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसका स्पष्टीकरण प्राप्त होने के बाद आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में केवल पत्राचार तक सीमित रहता है या जिम्मेदारों के खिलाफ ठोस कार्रवाई भी सुनिश्चित करता है।