नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में इथियोपिया और इरिट्रिया के दूतावासों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। टिग्रे संघर्ष को लेकर इथियोपियाई दूतावास की ओर से की गई टिप्पणी पर इरिट्रिया दूतावास ने कड़ी नाराजगी जताई है और इसे भ्रामक व तथ्यहीन करार दिया है। भारत में मौजूद इरिट्रिया के दूतावास ने बुधवार को एक बयान जारी किया। उन्होंने दिल्ली स्थित इथियोपियाई दूतावास की ओर से मीडिया के साथ बातचीत के दौरान लगाए गए आरोपों की कड़ी निंदा की। बयान में कहा गया, "इरिट्रिया ने न तो इथियोपिया को धमकी दी है और न ही टकराव की कोशिश की है।"
इरिट्रिया के दूतावास ने कहा, " पिछले कई वर्षों से इथियोपिया के अधिकारी लाल सागर तक पहुंच हासिल करने की अपनी महत्वाकांक्षा सार्वजनिक रूप से जाहिर करते रहे हैं। इससे इरिट्रिया के संप्रभु क्षेत्र, खासकर असब बंदरगाह को लेकर इथियोपिया की मंशा पर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं।"
बयान के अनुसार, किसी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी है। इरिट्रिया ने कहा कि उसे आक्रामक देश के रूप में पेश करने की कोशिश तथ्यों को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने जैसी है, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ने का खतरा है।
इरिट्रिया के दूतावास ने कहा कि देश संप्रभु समानता, दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने और पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है। उसने इथियोपिया के दूतावास से संयम बरतने और दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण संबंधों के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने की अपील की।
बयान में मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी आरोपों को सावधानीपूर्वक परखने, विश्वसनीय साक्ष्य मांगने और स्थिति का निष्पक्ष आकलन करने का आग्रह किया गया। इरिट्रिया ने कहा कि वह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए सतर्क है, लेकिन इसके साथ ही अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र के देशों के बीच शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप संबंधों की वकालत करता रहेगा।
इरिट्रिया ने स्पष्ट किया कि उसका संप्रभु अधिकार कमजोर करने की कोशिशों, धमकियों या भ्रामक सूचनाओं से उसकी सरकार और जनता भयभीत नहीं होगी। बयान में कहा गया कि शांति के प्रति इरिट्रिया की प्रतिबद्धता अटूट है और वह अपनी स्वतंत्रता, संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए दृढ़ है।
इरिट्रिया और इथियोपिया के बीच संबंध अक्टूबर 2026 में बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच एक बार फिर पूर्ण युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। दोनों के बीच लाल सागर को लेकर विवाद है। 1993 में इथियोपिया से अलग होकर इरिट्रिया के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद इथियोपिया की लाल सागर और असब बंदरगाह तक सीधी पहुंच बंद हो गई थी। इथियोपिया लगातार लाल सागर तक पहुंच बहाल करने की कोशिश कर रहा है, जिसे लेकर इरिट्रिया में गहरी आशंका बनी हुई है।












