जोहान्सबर्ग। दक्षिण अफ्रीका में 4 नवंबर को होने वाले स्थानीय चुनावों से पहले सामाजिक तनाव बढ़ता जा रहा है। देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और प्रवासियों के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों ने सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस महीने की शुरुआत में अवैध आव्रजन के खिलाफ प्रदर्शनों के बाद जोहान्सबर्ग की सोवेटो टाउनशिप और डरबन में अशांति देखने को मिली। इन घटनाओं ने देश के सामने लंबे समय से बनी बेरोजगारी, गरीबी और आव्रजन प्रबंधन जैसी चुनौतियों को फिर उजागर किया है।

सार्वजनिक हिंसा, संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और गैरकानूनी सभाओं के सिलसिले में पुलिस ने दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया है। शिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, क्वाजुलु-नताल प्रांत में तनाव विशेष रूप से बना हुआ है। यहां विदेशी नागरिकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ आगे भी हिंसा होने की आशंका जताई जा रही है।

स्थिति को देखते हुए दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने 9 अक्टूबर से 30 नवंबर तक प्रांत में दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रीय रक्षा बल के 510 सैनिकों की तैनाती को मंजूरी दी है। ये सैनिक पुलिस के अभियानों में सहायता करेंगे। पुलिस ने सार्वजनिक सुरक्षा के लिए संभावित खतरों की आशंका जताते हुए डरबन में प्रस्तावित प्रदर्शनों को रोकने के लिए अदालत का भी रुख किया है।

रंगभेद व्यवस्था (अपार्थाइड) समाप्त हुए तीन दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन देश के कई निम्न आय वाले समुदायों को अब भी आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं तक सीमित पहुंच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिन समुदायों में रोजगार और कारोबार के अवसरों के लिए प्रतिस्पर्धा अधिक है, वहां अनियमित आव्रजन सार्वजनिक आलोचना का प्रमुख विषय बनता जा रहा है। प्रवासी विरोधी समूहों का आरोप है कि बिना दस्तावेजों के रह रहे विदेशी नागरिकों की वजह से रोजगार, सार्वजनिक सेवाओं और सामुदायिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

नगरपालिका सेवाओं को लेकर असंतोष भी सामाजिक तनाव का एक बड़ा कारण है। कई समुदायों के लोगों ने पानी और बिजली की अनियमित आपूर्ति, खराब सड़कों, अपर्याप्त स्वच्छता व्यवस्था, कचरा प्रबंधन की समस्याओं और आवास उपलब्ध कराने में हो रही देरी को लेकर चिंता जताई है। इस पृष्ठभूमि में स्थानीय चुनावों से पहले आव्रजन, अपराध और बेरोजगारी प्रमुख चुनावी मुद्दे बनकर उभरे हैं।

राजनीतिक नेतृत्व के सामने चुनौती है कि वह लोगों की चिंताओं का समाधान करे, लेकिन इसके साथ ही किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने और देश के संवैधानिक सिद्धांतों को कमजोर करने से भी बचे। बढ़ते तनाव के बावजूद स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (आईईसी) ने स्थानीय चुनावों की तैयारियां जारी रखी हैं।

आईईसी के अनुसार, देश की आठ महानगरीय नगरपालिकाओं, 44 जिला नगरपालिकाओं और 205 स्थानीय नगरपालिकाओं में परिषद की कुल 10,526 सीटों के लिए 1,36,790 उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए प्रमाणित किया गया है।