बालाघाट, रितेश सोनी। बैगा अंचल में बच्चों की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। उकवा क्षेत्र के सुंदरवाही गांव की 11 वर्षीय बैगा बच्ची सुषमा मर्सकोले की 30 सितंबर को जिला चिकित्सालय बालाघाट में उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक सुषमा को 26 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह मलेरिया सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थी। उपचार के दौरान मलेरिया नियंत्रित किए जाने के बावजूद उसकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और उसने दम तोड़ दिया।
सुषमा की मौत ऐसे समय हुई, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बालाघाट दौरे की तैयारियां चल रही थीं। 1 अक्टूबर को राहुल गांधी ने बिरसा क्षेत्र के जगला गांव पहुंचकर मृत बच्चों के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान सुषमा की मौत की जानकारी राहुल गांधी के सामने प्रमुखता से नहीं आने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, सुषमा की मौत की जानकारी जानबूझकर उनसे छिपाए जाने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
प्रेस मीट में स्थानीय पत्रकारों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल
राहुल गांधी की प्रेस मीट में स्थानीय मीडिया की पहुंच को लेकर भी सवाल उठे हैं। आरोप लगाया गया कि स्थानीय पत्रकारों को प्रेस मीट के पास जारी नहीं किए गए, जिसके चलते क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से जुड़े सवाल सीधे राहुल गांधी के सामने नहीं रखे जा सके। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में स्वतंत्र रूप से पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
विधायक की भूमिका को लेकर उठ रहे सवाल
बैहर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक संजय उइके की भूमिका को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। क्षेत्र में लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और बैगा बच्चों की मौत का मुद्दा चर्चा में है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और बीमारी की रोकथाम को लेकर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
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विधायक संजय उइके ने मामले को लेकर कहा, “आंदोलन करना कांग्रेस का काम है, कांग्रेस करेगी। मैंने 13 साल में 18 बार विधानसभा में यह मुद्दा उठाया है। तो क्या कांग्रेस की 13 माह की सरकार में भी इनकी नहीं सुनी गई?” उनके बयान के बाद बैहर क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
बैगा बच्चों की मौत के आंकड़ों में भी अंतर
बैगा अंचल में बच्चों की मौत के आंकड़ों को लेकर भी अलग-अलग जानकारी सामने आई है। प्रशासनिक रिकॉर्ड में मृत बच्चों की संख्या 32 से 33 बताई जा रही है, जबकि विधायक संजय उइके ने 43 बच्चों की मौत का दावा किया है। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्टों में सुषमा की मौत के बाद यह आंकड़ा 34 बताया गया। अलग-अलग आंकड़ों के चलते वास्तविक स्थिति को लेकर भी स्पष्टता की मांग उठ रही है।
स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में बैगा अंचलों में मलेरिया, खसरा, कुपोषण और अन्य बीमारियों को बच्चों की स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है। सुषमा की मौत के बाद अब बैगा बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, बीमारी की समय पर पहचान और उपचार, रोकथाम के उपायों तथा बच्चों की मौत के वास्तविक आंकड़ों को लेकर प्रशासन से स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी की मांग उठ रही है।












