रीवा, राजन शुक्ला। रीवा जिले की सिलपरा नहर में लापता हुए भारतीय सेना के जवान का शव आखिरकार छह दिन बाद बरामद कर लिया गया। जवान छुट्टी पर अपने गृह ग्राम आए हुए थे और सिलपरा नहर क्षेत्र में घूमने के दौरान अचानक पैर फिसलने से तेज बहाव में बह गए थे। घटना के बाद से प्रशासन, एसडीईआरएफ और अन्य बचाव दल लगातार उनकी तलाश में जुटे हुए थे।


बुधवार को हुई इस घटना के बाद कई दिनों तक व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया गया। वाराणसी से आई विशेषज्ञ टीमों ने भी खोज अभियान में भाग लिया, लेकिन नहर के तेज बहाव और गहरे पानी के कारण जवान का कोई सुराग नहीं मिल सका। मामले की गंभीरता को देखते हुए सेना को सूचना दी गई, जिसके बाद आगरा से 411 पैरा ब्रिगेड की विशेष कमांडो टीम रीवा पहुंची।


कमांडो टीम ने आधुनिक ड्रोन तकनीक और विशेष उपकरणों की मदद से मात्र दो घंटे के भीतर जवान के शव की लोकेशन का पता लगा लिया। हालांकि उस समय नहर में पानी का स्तर अधिक होने और टरबाइन के दबाव के कारण शव तक पहुंचना संभव नहीं था। इसके बाद स्थानीय प्रशासन के सहयोग से नहर का जलस्तर कम कराया गया।


शनिवार सुबह करीब पांच बजे दोबारा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। लगभग तीन घंटे की मशक्कत के बाद सुबह आठ बजे जवान के शव को नहर से बाहर निकाल लिया गया। ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे सेना के अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक तकनीक और प्रशासन के समन्वय से अभियान सफल हो सका।


घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं स्थानीय लोगों और पूर्व सैनिकों ने बचाव एजेंसियों में आधुनिक संसाधनों की कमी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि अत्याधुनिक उपकरण पहले से उपलब्ध होते तो जवान का पता लगाने और ऑपरेशन पूरा करने में कम समय लगता। इस घटना ने एक बार फिर आपदा प्रबंधन तंत्र की तैयारियों और संसाधनों को लेकर गंभीर चर्चा छेड़ दी है।