रायगढ़, छत्तीसगढ़, रोहित तिर्की। देश की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत बन रही सड़क की गुणवत्ता अब सवालों के घेरे में है। निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही सड़क पर कई स्थानों पर दरारें दिखाई देने लगी हैं। इन दरारों ने निर्माण गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
निर्माण एजेंसी DBL के प्रतिनिधि प्रदीप सिंह का कहना है कि सड़क अभी संबंधित विभाग को हैंडओवर नहीं की गई है और जहां-जहां दरारें आई हैं, वहां सुधार कर दिया जाएगा।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल मरम्मत कर देना ही पर्याप्त समाधान है? आखिर सड़क में दरारें क्यों आईं? क्या यह सामान्य तकनीकी समस्या है या निर्माण सामग्री और गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी? क्या निर्माण कार्य के दौरान सभी मानकों का पालन किया गया?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल पैचवर्क नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष तकनीकी जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक कारण सामने आ सके और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
अब निगाहें संबंधित प्राधिकरण पर हैं। क्या NHAI इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कराएगा? यदि जांच में गुणवत्ता से समझौता या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो क्या जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दरारों के कारण सार्वजनिक किए जाएं और करोड़ों रुपये की इस महत्वपूर्ण परियोजना में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो। फिलहाल इस मामले पर सभी की नजरें संबंधित विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।




