छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। प्रशासनिक दबाव के बावजूद बुधवार दोपहर से बड़ी संख्या में आदिवासी किसान, खासकर महिलाएं, ‘चिता आंदोलन’ के जरिए अपना विरोध जता रही हैं। इस अनोखे और भावनात्मक प्रदर्शन ने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।


आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं आदिवासी महिलाएं और जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने सरकार के खिलाफ तीखा रुख अपनाया है। प्रदर्शन के दौरान महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर विरोध कर रही हैं। उनके हाथों में ‘जमीन ली, जान मत लो’ और ‘किसानों पर अत्याचार नहीं सहेंगे’ जैसे नारे लिखी तख्तियां हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि या तो उन्हें न्याय दिया जाए या फिर उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया जाए।


प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने उन्हें दिल्ली जाकर अपनी बात रखने से रोक दिया। रास्तों में अवरोध लगाए गए और राशन-पानी तक की आपूर्ति बाधित की गई। इतना ही नहीं, उन्हें धमकियां भी दी जा रही हैं। अब प्रशासन ने गांव और जंगल क्षेत्रों में धारा 163 लागू कर बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है, जिसे आंदोलनकारी दमनकारी कदम बता रहे हैं।


प्रशासनिक सख्ती के बावजूद आंदोलनकारियों ने विरोध का अनूठा तरीका अपनाया है। केन नदी के बीच खड़े होकर पन्ना और छतरपुर के किसान अपनी-अपनी सीमाओं में रहते हुए संयुक्त रूप से प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे आंदोलन और अधिक प्रतीकात्मक और मजबूत बन गया है।


ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और वन विभाग ने सभी रास्तों पर पहरा लगा दिया है, जिससे न केवल लोगों की आवाजाही रोकी जा रही है बल्कि जरूरी सामान की आपूर्ति भी बाधित हो रही है। दुकानदारों को धमकाकर हटाया गया है और गांवों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे आंदोलनकारियों की मदद न करें।


इसी बीच आंदोलन समाप्त कराने के प्रयास में महिलाओं और पुलिस के बीच झड़प भी हुई, जिसमें पुलिस को पीछे हटना पड़ा। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर ने आरोप लगाया कि प्रशासन, पुलिस और सत्ता से जुड़े लोगों के गठजोड़ से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और ग्रामीणों का शोषण हो रहा है।


आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने इसे आर-पार की लड़ाई बताते हुए कहा कि वे अपनी जमीन और अधिकारों के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखेंगे।