छतरपुर। जिले के ईशानगर क्षेत्र में इंदौर जैसे एक खौफनाक अग्निकांड की पुनरावृत्ति होते-होते बची, जिसने ई-स्कूटी की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भेलसी गांव के स्कूल मोहल्ला में शनिवार की आधी रात को एक घर के भीतर चार्जिंग पर लगी इलेक्ट्रिक स्कूटी में हुए जोरदार धमाके ने न केवल पूरे परिवार की नींद उड़ा दी, बल्कि देखते ही देखते दो ई-स्कूटी और एक साइकिल को राख के ढेर में तब्दील कर दिया। इस पूरी घटना का सार उस तकनीकी चूक और बैटरी फटने के खतरों में छिपा है, जिसके कारण एक हँसता-खेलता परिवार चंद मिनटों में भारी आर्थिक नुकसान की चपेट में आ गया।
आधी रात का धमाका और आग की लपटों के बीच फंसा परिवार
जानकारी के अनुसार, भेलसी निवासी रामगोपाल प्रजापति (40) ने शनिवार रात अपनी इलेक्ट्रिक स्कूटी को चार्जिंग पर लगाया था। रात करीब 12 बजे जब पूरा परिवार गहरी नींद में था, तभी एक भीषण धमाके के साथ स्कूटी में आग लग गई। धमाके की आवाज सुनकर जब रामगोपाल और उनकी पत्नी बाहर निकले, तो नीचे का हिस्सा धुएं और आग की लपटों से घिरा हुआ था। सीढ़ियों पर आग का कब्जा होने के कारण परिवार के सदस्य ऊपर ही फंस गए, जिससे स्थिति और भी भयावह हो गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा हाल ही में सुरक्षा मानकों को लेकर दिए गए निर्देशों के बीच, जिले में हुई यह घटना बिजली के उपकरणों के रखरखाव के प्रति बड़ी चेतावनी है।
बैटरी फटने का खौफ और मोहल्लेवासियों की सूझबूझ
रामगोपाल ने बताया कि आग इतनी भयंकर थी कि उसे बुझाना नामुमकिन लग रहा था। आग की लपटें बगल में रखी दूसरी इलेक्ट्रिक स्कूटी और एक साइकिल तक भी पहुँच गईं, जिससे वे भी जलकर खाक हो गईं। परिवार के लोग आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बीच-बीच में बैटरी फटने के धमाके उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर रहे थे। जान बचाने के लिए रामगोपाल ने छत से शोर मचाकर मोहल्लेवासियों को मदद के लिए पुकारा। शोर सुनकर जमा हुए ग्रामीणों की सक्रियता और कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक दोनों कीमती ई-स्कूटी और साइकिल पूरी तरह नष्ट हो चुकी थीं।
पुलिस की प्राथमिक जांच और सुरक्षा पर उठते सवाल
मौके पर पहुँची पुलिस का प्राथमिक तौर पर मानना है कि चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट होने से बैटरी में ब्लास्ट हुआ, जिससे यह भीषण आग लगी। ईशानगर पुलिस इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है कि क्या स्कूटी की बैटरी में कोई तकनीकी खराबी थी या चार्जिंग के दौरान कोई लापरवाही बरती गई। यह हादसा ई-स्कूटी उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा सबक है कि बंद घरों या सीढ़ियों के पास वाहनों को चार्ज करना कितना जानलेवा साबित हो सकता है। फिलहाल, भेलसी का यह परिवार इस हादसे के सदमे से उबरने की कोशिश कर रहा है, जहाँ उनकी मेहनत की कमाई चंद मिनटों में धुएं में मिल गई।



