नई दिल्ली। ईरान के साथ जारी जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हथ‍ियारों की सप्‍लाई को लेकर चीन और रूस पर भरोसे की बात को दोहराया। ट्रंप ने दावा किया है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे ईरान को हथियार नहीं देंगे और न ही बेचेंगे। अगर वो ऐसा करते तो उनके लिए यह बहुत बुरा होता।

ट्रंप ने यूक्रेन को होने वाली हथ‍ियार सप्‍लाई को लेकर अपना बचाव भी क‍िया। ट्रंप ने कहा क‍ि अमेरिका सीधे यूक्रेन को नहीं, बल्कि नाटो देशों को हथियार बेचता है और इसके बाद उनका इस्तेमाल कैसे होता है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं होती।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पोस्‍ट पर ल‍िखा, ''हाल ही में बीजिंग, चीन में हुई हमारी मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति शी ने मुझसे कहा कि वे किसी भी हालत में ईरान को हथियार न देंगे और न ही बेचेंगे। उन्होंने साफ कहा कि इसमें चीनी कंपनियां भी शामिल हैं। हमारे रिश्ते को देखते हुए मैं उनकी बात पर भरोसा करता हूं। इसके अलावा मैं भी उनके लिए बहुत बड़े-बड़े काम कर रहा हूं। रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने भी मुझसे कहा कि वे ईरान को हथियार नहीं बेचेंगे।''

ट्रंप ने कहा क‍ि वे यह समझते हैं कि मैं यूक्रेन को हथियार नहीं बेचता, बल्कि नाटो के देशों को बेचता हूं। वे इसकी पूरी कीमत चुकाते हैं और उसके बाद उन हथियारों का इस्तेमाल या बंटवारा कैसे होता है, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है।

ट्रंप ने कहा क‍ि मेरी राय में ईरान के संदर्भ में जिन दो बड़े देशों का अक्सर ज‍िक्र होता है, वे इसमें शामिल नहीं हैं। अगर वे ऐसा करते, तो उनके लिए यह बहुत बुरा होता। यह निश्चित रूप से उनके हित में नहीं होगा।

अमेर‍िका और ईरान के बीच वार-पलटवार को स‍िलस‍िला जारी है। संघर्ष विराम समझौता टूटने के बाद अमेर‍िका ने लगातार 13वीं रात ईरान के ऊपर हमला जारी रखा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया क‍ि ईस्टर्न टाइम के हिसाब से शाम 6:45 बजे हमले शुरू हुए। उनका मकसद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से कमर्शियल शिपिंग को होने वाले खतरों को कम करना था।

वहीं दूसरी ओर आईआरजीसी ने भी पलटवार करते हुए शुक्रवार शाम कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और संसाधनों पर जवाबी हमले किए।

आईआरजीसी ने अपने आधिकारिक समाचार माध्यम सेपा न्यूज के हवाले से कहा कि ये हमले अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ किए गए अपराधों के जवाब में किए गए।