कोलकाता। पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील ने शनिवार को साल्ट लेक स्टेडियम में खेले गए ऐतिहासिक मुकाबले में भारत को 4-0 से हरा दिया। सीनियर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और ब्राजील की पुरुष फुटबॉल टीमों के बीच यह पहली भिड़ंत थी।

भारत ने मैच की अच्छी शुरुआत की और ब्राजील को अपनी बढ़त हासिल करने से रोके रखा। हालांकि, धीरे-धीरे ब्राजील ने मैच पर पकड़ बनानी शुरू की और हाफ टाइम से पहले दो गोल कर दिए।

एस्टेवाओ ने 28वें मिनट में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्राजील के लिए पहला गोल किया। वह गेंद लेकर पेनल्टी एरिया में पहुंचे और नजदीकी पोस्ट की ओर तेज शॉट लगाया। भारतीय गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू ने गेंद को छुआ, लेकिन उसे गोल में जाने से नहीं रोक पाए।

ब्राजील ने इसके बाद भी भारत पर दबाव बनाए रखा और हाफ टाइम से तीन मिनट पहले अपनी बढ़त 2-0 कर ली।

इस गोल में भी एस्टेवाओ की अहम भूमिका रही। उन्होंने भारतीय डिफेंस के पीछे की ओर दौड़ रहे पेड्रो को गेंद दी। पेड्रो ने मुश्किल एंगल से गोल करने की कोशिश की। गुरप्रीत गेंद को रोकते नजर आए, लेकिन गेंद उनके हाथों से निकलकर गोल लाइन पार कर गई।

ब्राजील के मुख्य कोच कार्लो एंसेलोटी ने हाफ टाइम के बाद पांच बदलाव किए। ब्रूनो गुइमारेस, गैब्रियल मैगलहेस, वैंडरसन, सैमुअल लिनो और डगलस लुइज को मैदान पर उतारा गया।

इन बदलावों के बावजूद मैच पर ब्राजील का नियंत्रण बना रहा। मेहमान टीम ने 58वें मिनट में तीसरा गोल कर दिया।

भारत ने खतरनाक जगह पर गेंद का कब्जा गंवा दिया, जिसका ब्राजील ने तुरंत फायदा उठाया। बाईं ओर मिली जगह का इस्तेमाल करते हुए लिनो को पेनल्टी एरिया के अंदर गेंद मिली। उन्होंने गेंद को दूर वाले कोने में पहुंचाकर शानदार गोल किया। गुरप्रीत के पास इस शॉट को रोकने का ज्यादा मौका नहीं था।

इसके बाद इंजरी टाइम में लिनो ने एक और गोल करते हुए अपना दूसरा गोल पूरा किया और ब्राजील की जीत का अंतर 4-0 कर दिया।

यह मैच इसलिए भी ऐतिहासिक रहा क्योंकि ब्राजील की सीनियर पुरुष राष्ट्रीय टीम पहली बार भारत में खेलने उतरी।

फीफा पुरुष विश्व रैंकिंग में पांचवें स्थान पर मौजूद ब्राजील रैंकिंग सिस्टम शुरू होने के बाद भारत का सामना करने वाली सबसे ऊंची रैंकिंग वाली टीम भी बनी। भारत फिलहाल 138वें स्थान पर है।

भारतीय टीम इस मुकाबले से पहले दुनिया की 44वें नंबर की टीम पनामा के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ खेलकर आई थी। यह किसी टॉप-50 टीम के खिलाफ भारत का पहला ऐसा नतीजा था, जिसमें टीम को हार का सामना नहीं करना पड़ा था।