इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में दशकों से चल रहा विद्रोह और अधिक गंभीर हो गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों पर नागरिकों के जबरन गायब किए जाने और बिना मुकदमे के हत्या जैसे आरोपों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।

दक्षिण एशिया टेररिज्म पोर्टल (एसएटीपी) के आंशिक आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वर्ष 21 जून तक बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) से जुड़े 59 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 233 लोगों की मौत हुई। इनमें 21 नागरिक, 203 सुरक्षा बलों के जवान और 9 उग्रवादी शामिल हैं।

तुलनात्मक रूप से, वर्ष 2025 में ऐसी 93 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें कुल 273 लोगों की जान गई थी। इनमें 30 नागरिक, 226 सुरक्षा बलों के जवान और 17 उग्रवादी शामिल थे।

एक रिपोर्ट के अनुसार, बीएलएफ ने 4 जनवरी 2026 को अपने वार्षिक ऑपरेशनल रिपोर्ट में 2025 को “राष्ट्रीय प्रतिरोध संघर्ष” के लिए निर्णायक वर्ष बताया और दावा किया कि उसने तटीय क्षेत्रों, शहरी इलाकों, हाईवे और दूरदराज के क्षेत्रों में सुरक्षा बलों और सरकारी ढांचे को निशाना बनाकर योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाए।

बीएलएफ ने दावा किया कि 2025 में उसने 581 सशस्त्र कार्रवाइयां कीं, जिनमें 929 लोग हताहत हुए। इनमें 647 की मौत और 282 घायल शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, घायल हुए लोगों में पाकिस्तानी सेना और फ्रंटियर कॉर्प्स के जवान, खुफिया एजेंसियों के कर्मी, पुलिसकर्मी, “डेथ स्क्वॉड” के सदस्य और कोस्ट गार्ड के कर्मी शामिल थे।

बीएलएफ ने अपनी गतिविधियों में घात लगाकर हमले, ग्रेनेड हमले, आईईडी विस्फोट, स्नाइपर हमले और भारी हथियारों का इस्तेमाल करने जैसे कई अभियानों का दावा किया है।

8 जून को खुजदार जिले के नाल शहर में हुए एक बड़े हमले का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि बीएलएफ ने दावा किया कि उसने इलाके पर कुछ समय के लिए नियंत्रण स्थापित कर लिया था और पुलिस स्टेशन सहित कई सरकारी इमारतों को अपने कब्जे में ले लिया था।

समूह ने यह भी दावा किया कि उसने एक फैक्ट्री को आग लगा दी, जिसे वह बलूचिस्तान के संसाधनों के दोहन में शामिल बताता है।

13 जून को जारी बयान में बीएलएफ ने कहा कि नाल में हुए समन्वित गुरिल्ला हमले में 33 पाकिस्तानी सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएलएफ की बढ़ती गतिविधियां, रणनीतिक विस्तार और लगातार हमले इस बात का संकेत हैं कि बलूचिस्तान में राजनीतिक और सुरक्षा समस्याएं अभी भी अनसुलझी हैं और केवल बल प्रयोग से स्थायी शांति संभव नहीं है।