बीजिंग। चीन का सत्ताधारी दल बूढ़ा हो रहा है, यानी इस पुरानी पार्टी के ज्यादातर सदस्य उम्रदराज हैं और युवाओं की कमी महसूस की जाने लगी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्य संख्या धीमी गति से बढ़ रही है, इसके सदस्य बूढ़े हो रहे हैं, और सदस्यों की डेमोग्राफिक प्रोफाइल (जनसांख्यिकीय स्थिति) चीनी समाज के सामने मौजूद संरचनात्मक चुनौतियों को दिखाती है।कम्युनिस्ट पार्टी के संगठन विभाग ने कुछ आंकड़े जारी किए हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अंत तक पार्टी के कुल सदस्यों की संख्या 10.1 करोड़ (101 मिलियन) रही। यह पिछले वर्ष की तुलना में सिर्फ एक प्रतिशत की वृद्धि है, जो पिछले कम से कम पांच वर्षों में सबसे धीमी वृद्धि दर मानी जा रही है।

पीएमएल डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 के बाद से कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता विस्तार की गति लगातार धीमी हुई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पार्टी के सदस्यों की उम्र भी लगातार बढ़ रही है। करीब 30 प्रतिशत सदस्य 61 वर्ष या उससे अधिक आयु के हैं, जो पिछले कम से कम पांच वर्षों में सबसे अधिक अनुपात है। इसके विपरीत 35 वर्ष या उससे कम आयु के सदस्यों की हिस्सेदारी घटकर 22 प्रतिशत रह गई है। वर्ष 2021 में यह लगभग एक-चौथाई थी।

यह स्थिति तब है, जब पार्टी युवाओं को जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वर्ष 2025 में पार्टी में शामिल होने वाले 80 प्रतिशत से अधिक नए सदस्य 35 वर्ष से कम आयु के थे, लेकिन इसके बावजूद पार्टी के समग्र आयु ढांचे में युवाओं की हिस्सेदारी बढ़ नहीं सकी।

रिपोर्ट के अनुसार, केवल नए सदस्यों की भर्ती से बढ़ती उम्र वाले सदस्य आधार, औसत जीवन प्रत्याशा में वृद्धि और देश में युवाओं की घटती संख्या जैसे कारकों की भरपाई संभव नहीं हो पा रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कम्युनिस्ट पार्टी की बदलती जनसांख्यिकीय संरचना चीन की व्यापक जनसंख्या संबंधी चुनौतियों को दर्शाती है। वर्षों से जारी घटती जन्म दर, तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी और लगातार चार वर्षों से कुल जनसंख्या में गिरावट के कारण कार्यबल में प्रवेश करने वाली युवा पीढ़ी का आकार छोटा होता जा रहा है।

इसी वजह से चीन की कुल आबादी में कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों की हिस्सेदारी 2021 के 6.85 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 7.21 प्रतिशत हो गई है। हालांकि यह वृद्धि पार्टी के तेज विस्तार के कारण नहीं, बल्कि देश की कुल आबादी में कमी आने की वजह से हुई है।

इस बीच, चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय द्वारा जुलाई में जारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अंत तक चीन में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों की संख्या 32.338 करोड़ (323.38 मिलियन) हो गई, जो देश की कुल आबादी का 23 प्रतिशत है।

वहीं, 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों की संख्या 22.365 करोड़ (223.65 मिलियन) रही, जो कुल आबादी का 15.9 प्रतिशत है। यह जानकारी चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने प्रकाशित की।

आंकड़ों के अनुसार, 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों का वृद्धावस्था निर्भरता अनुपात 23.1 प्रतिशत है, जबकि चीन में औसत जीवन प्रत्याशा 79.25 वर्ष दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले दशकों में जन्म दर में गिरावट, पहले की बड़ी जन्म पीढ़ियों का वृद्धावस्था में पहुंचना और लगातार बढ़ती जीवन प्रत्याशा के कारण चीन अब तेजी से एक वृद्ध समाज में बदल चुका है। इसके प्रभाव केवल अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश की सबसे बड़ी राजनीतिक संस्था कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्य संरचना पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।