भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के सर्वांगीण विकास, जनकल्याण और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने के लिए कुल 5 हजार 960 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं सहित कई बड़े जनहितैषी निर्णयों को मंजूरी दी गई है। इस कैबिनेट बैठक में किसानों, बेटियों, शिक्षा और जनजातीय क्षेत्रों के विकास को लेकर कई दूरगामी फैसले लिए गए।
कैबिनेट बैठक में किसानों को बड़ी राहत देते हुए वर्ष 2026-27 के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पकालिक फसल ऋण देने की योजना के अंतर्गत नई और बेहद सरल शर्तों को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इसके साथ ही सामाजिक उत्थान की दिशा में एक बड़ा निर्णय लेते हुए 'मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना' को 1 अप्रैल 2026 से आगामी 5 वर्षों तक निरंतर संचालित रखने के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रुपये के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी गई है।
फसल ऋण योजना में बड़ा बदलाव: अब खरीफ-रबी की अलग ड्यू डेट नहीं, 12 महीने की होगी सिंगल लिमिट
किसानों के आर्थिक संबल के लिए कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई नई व्यवस्था के तहत अल्पकालिक फसल ऋण योजना में नियमों को बेहद सरल और किसान हितैषी बनाया गया है:
- वार्षिक एकल ऋण सीमा: अब खरीफ और रबी सीजन के लिए अलग-अलग देय तिथि (ड्यू डेट) निर्धारित करने की जटिल व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर अब एक 'वार्षिक एकल ऋण सीमा' (एनुअल सिंगल लोन लिमिट) लागू होगी, जिसमें नगद और वस्तु (खाद-बीज) ऋण की उप-सीमा पहले से तय रहेगी।
- 12 महीने की समय सीमा: किसानों के लिए नई देय तिथि (ड्यू डेट) उनके द्वारा स्वीकृत वार्षिक एकल लिमिट से पहले ऋण आहरण (पैसा निकालने) की तारीख से ठीक 12 माह निर्धारित की जाएगी।
- ब्याज अनुदान और प्रोत्साहन: इस योजना के अंतर्गत अल्पावधि फसल ऋण लेने वाले किसानों को सरकार की तरफ से 1.25 प्रतिशत का सामान्य ब्याज अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा, जो किसान अपनी निर्धारित ड्यू डेट तक पूरी ईमानदारी से ऋण की अदायगी (पुनर्भुगतान) कर देंगे, उन्हें राज्य शासन द्वारा 4 प्रतिशत प्रोत्साहन स्वरूप अतिरिक्त ब्याज अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
मध्य प्रदेश में जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों से जुड़ी बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण देने की यह महत्वाकांक्षी योजना वर्ष 2012-13 से निरंतर लागू है। इस योजना के तहत समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों से 3 लाख रुपये तक के फसल ऋण पर कोई ब्याज नहीं लिया जाता है। हर साल राज्य सरकार बेस रेट तय करती है, जिसमें से केंद्र सरकार से मिलने वाली ब्याज सहायता को घटाकर शेष बची हुई राशि राज्य शासन खुद ब्याज अनुदान के रूप में वहन करता है, जिससे किसानों को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के शून्य प्रतिशत पर ऋण मिल पाता है।
शिक्षा में क्रांतिकारी कदम और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए ₹3,580 करोड़ मंजूर
कैबिनेट ने प्रदेश के युवाओं और गरीब परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई अन्य अहम प्रस्तावों पर भी अपनी मुहर लगाई है:
- शासकीय स्कूलों का उच्च स्तरीय उन्नयन: शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के शासकीय माध्यमिक और हाई स्कूलों के उच्च स्तरीय उन्नयन (अपग्रेडेशन) की योजना को सैद्धांतिक सहमति दी गई है। इस निर्णय से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा तक पहुंच आसान होगी और बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉप आउट दर) की संख्या में भारी कमी आएगी।
- शाजापुर को नए लॉ कॉलेज की सौगात: शाजापुर जिले के शुजालपुर में युवाओं की मांग को देखते हुए एक नवीन 'शासकीय विधि महाविद्यालय' (गवर्नमेंट लॉ कॉलेज) की स्थापना को मंजूरी दे दी गई है, जिससे क्षेत्र के छात्रों को कानून की पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
- राशन व्यवस्था के लिए बड़ा बजट: लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत प्रदेश के गरीब परिवारों को निरंतर खाद्यान्न की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 3 हजार 580 करोड़ रुपये से अधिक की भारी राशि की निरंतरता को मंजूरी दी गई है। इसके अतिरिक्त, कैबिनेट ने सुदूर जनजातीय क्षेत्रों के शत-प्रतिशत विद्युतीकरण (बिजली पहुंचाने) को लेकर भी बेहद महत्वपूर्ण विकासात्मक निर्णय लिए हैं।



