छतरपुर, विनोद मिश्रा। बुंदेलखंड क्षेत्र में इस वर्ष मानसून की देरी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। छतरपुर सहित पूरे इलाके में खरीफ सीजन की बुवाई प्रभावित हो रही है। सोयाबीन, मूंगफली, उड़द और तिल जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई के लिए किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि छतरपुर शहर से सटे कुछ गांवों में करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई, लेकिन जिले के अधिकांश क्षेत्रों में केवल आंधी चलने से किसानों को राहत नहीं मिल सकी।


बारिश के बाद निकली तेज धूप और बढ़ी उमस ने आम लोगों के साथ किसानों की परेशानियां भी बढ़ा दी हैं। ग्राम बृजपुरा, गठेवरा, सिमरिया, कदारी, पूछी और दलौन सहित कई गांवों के किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार मानसून काफी देर से पहुंच रहा है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ती जा रही है। किसानों के सामने केवल मौसम की चुनौती ही नहीं है, बल्कि खाद की किल्लत और बढ़ती कीमतें भी बड़ी समस्या बनकर सामने आई हैं। किसानों का आरोप है कि जो खाद पिछले वर्ष 1300 से 1400 रुपये प्रति बोरी मिलती थी, वह अब 2100 से 2600 रुपये तक खरीदनी पड़ रही है। इसके अलावा डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने खेती की लागत को और बढ़ा दिया है।


किसानों का कहना है कि समय पर बारिश नहीं होने से खेत खाली पड़े हैं और बुवाई का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। वहीं खेती में उपयोग होने वाली खाद और अन्य संसाधनों की कीमतों में लगातार वृद्धि होने से आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। किसानों ने सरकार से राहत और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। कृषकों का आरोप है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन फसलों के उचित दाम और कृषि संसाधनों की उपलब्धता को लेकर प्रशासन एवं सरकार की ओर से कोई ठोस कदम दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में किसान मौसम और महंगाई की दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। अब किसानों की उम्मीद आने वाले दिनों में होने वाली बारिश पर टिकी है। उनका कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ सीजन की फसलें प्रभावित हो सकती हैं, जिसका सीधा असर किसानों की आय और क्षेत्र की कृषि व्यवस्था पर पड़ेगा। किसानों ने सरकार से मांग की है कि बढ़ती महंगाई और कृषि संकट को देखते हुए ठोस राहत उपाय किए जाएं।