छतरपुर, विनोद मिश्रा। जिला अस्पताल में अज्ञात मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। नौगांव से सड़क दुर्घटना में घायल होकर रेफर किए गए करीब 45 वर्षीय व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई, लेकिन उसके पास मिले मोबाइल, पर्स और नकदी समय पर पुलिस को नहीं सौंपे गए। इसके चलते शव तीन दिन तक जिला अस्पताल की मर्चुरी में अज्ञात अवस्था में पड़ा रहा, जबकि परिजन उसकी तलाश में भटकते रहे।
जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह करीब 7:30 बजे नौगांव अस्पताल से घायल को जिला अस्पताल रेफर किया गया था। ट्रॉमा वार्ड में सुबह 9:15 बजे उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक के पास मोबाइल, पर्स और नकदी होने के बावजूद संबंधित सामग्री पुलिस के सुपुर्द नहीं की गई। इस मामले में अस्पताल स्टाफ के अलग-अलग दावे सामने आए। वार्ड बॉय सुनील सोनी ने बताया कि उन्होंने सामान नर्सिंग ऑफिसर रितेश सिंह को सौंप दिया था, जबकि रितेश सिंह का कहना है कि उन्होंने सामान इमरजेंसी इंचार्ज दीपशिखा रंगढाले को दे दिया। वहीं दीपशिखा रंगढाले ने इस संबंध में जानकारी होने से इनकार किया।
मामले की जांच के दौरान अस्पताल पुलिस चौकी प्रभारी रविंद्र मिश्रा ने संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की, लेकिन सभी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए। आखिरकार बुधवार को नौगांव पुलिस को सूचना दिए जाने के बाद उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के परिजनों से संपर्क हुआ और शव की पहचान महोबा जिले के महोबकंठ थाना क्षेत्र के कोटरा निवासी रामकुमार के रूप में हुई।
यदि मृतक का मोबाइल और अन्य दस्तावेज समय रहते पुलिस को सौंप दिए जाते तो उसकी पहचान पहले ही हो सकती थी और परिजनों को तीन दिन तक परेशान नहीं होना पड़ता। इस घटना ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं, जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया और पुलिस-अस्पताल समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने बताया कि घटना के समय इमरजेंसी इंचार्ज दीपशिखा रंगढाले ड्यूटी पर नहीं थीं। उनके अनुसार वार्ड बॉय ने सामान सुरक्षित रखने के उद्देश्य से नर्स के ड्रॉअर में रख दिया था, लेकिन इसकी सूचना देना भूल गया। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में कोई वीडियो या अन्य साक्ष्य सामने आते हैं तो जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल पुलिस चौकी द्वारा भी कई बार जप्ती का सामान तत्काल प्राप्त नहीं किया जाता। बाद में सीएसपी अरुण सोनी से चर्चा के बाद सामान पुलिस को सौंपा गया।
वहीं अस्पताल पुलिस चौकी के कर्मचारियों ने बताया कि उनके पास मृतक का पर्स और करीब तीन हजार रुपये सुरक्षित रखे गए हैं। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह सामान वास्तविक हकदार को सौंप दिया जाएगा। घटना ने जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग तेज कर दी है।




