छिंदवाड़ा, जीशान अंसारी। मध्य प्रदेश के नवनिर्मित जिले पांढुर्ना के अंतर्गत आने वाले ग्राम काराघाट कामठी से महिला एवं बाल विकास विभाग की बेहद शर्मनाक और खौफनाक लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां एक आंगनवाड़ी केंद्र से नौनिहालों को वितरित किए जाने वाले सरकारी पोषण आहार (सत्तू) के पैकेट के भीतर सांप का मरा हुआ बच्चा (अवशेष) मिलने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। बच्चों की सेहत और जिंदगी के साथ किए जा रहे इस खिलवाड़ को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है, जिससे पोषण आहार बनाने वाली कंपनियों और उसकी गुणवत्ता जांचने वाली व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत में मेट का कार्य करने वाले स्थानीय ग्रामीण शेशराव धुर्वे को उनकी डेढ़ वर्षीय मासूम पुत्री के लिए गांव के ही आंगनवाड़ी केंद्र से हाल ही में रेडी-टू-ईट पोषण आहार के तहत सत्तू के 4 पैकेट दिए गए थे। पीड़ित परिवार सत्तू के 3 पैकेटों का इस्तेमाल पहले ही कर चुका था, लेकिन जैसे ही उन्होंने बच्चों को खिलाने के लिए चौथा और अंतिम पैकेट खोला, तो उनके होश उड़ गए। सत्तू के उस बंद पैकेट के भीतर एक मृत सांप के अवशेष दिखाई दिए। शेशराव ने तुरंत इसकी जानकारी आसपास के पड़ोसियों को दी, जिसके बाद यह सनसनीखेज खबर आग की तरह पूरे गांव में फैल गई और ग्रामीणों का हुजूम इकट्ठा हो गया।
मासूम बच्चों को बांटे जा रहे भोजन में सांप मिलने की बात से नाराज बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं तुरंत आंगनवाड़ी केंद्र जा पहुंचे और अधिकारियों के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस लापरवाही के जिम्मेदार लोगों पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और इस केंद्र सहित आसपास के अन्य गांवों में बांटे गए सत्तू के पूरे बैच की सप्लाई रोककर उसकी बारीकी से लैबोरेट्री जांच कराई जाए, ताकि अन्य बच्चों की जान को खतरे में पड़ने से बचाया जा सके। घटना की भनक लगते ही प्रशासनिक अमला तुरंत हरकत में आया और आनन-फानन में महिला बाल विकास विभाग तथा राजस्व की संयुक्त जांच टीम मौके पर भेजी गई।
जांच अधिकारियों ने पीड़ित के घर पहुंचकर सत्तू के पैकेट का बारीकी से निरीक्षण किया और मृत सांप के अवशेषों को जब्त करते हुए मौके पर ही पंचनामा तैयार किया। प्रशासनिक टीम ने संबंधित बैच के बचे हुए पोषण आहार को भी अपने कब्जे में ले लिया है। इस गंभीर घटना के बाद एहतियातन तौर पर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर तुरंत इलाज मिल सके। अब सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि कड़े सुरक्षा मानकों के दावों के बीच बच्चों के खाने वाले पैकेट में जहरीला सांप आखिर पहुंचा कैसे। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह पूरी तरह साफ हो पाएगा कि यह जानलेवा चूक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी की पैकिंग के दौरान हुई थी या फिर विभाग के गोदामों में भंडारण व्यवस्था की बदहाली के कारण हुई है। फिलहाल, पूरे पांढुर्ना जिले में इस घटना को लेकर तीखी चर्चाएं चल रही हैं और ग्रामीण दोषियों पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।

