ढाका। बांग्लादेश से अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर चिंता बढ़ाने वाली घटना सामने आई है। यहां खुलना इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (केयूईटी) ने कथित अनुशासनहीनता और अन्य अनियमितताओं के आरोप में तीन हिंदू शिक्षकों और दो अन्य हिंदू कर्मचारियों सहित सात कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। स्थानीय मीडिया ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
केयूईटी के रजिस्ट्रार इंजीनियर अनिसुर रहमान भुइयां के अनुसार, यह निर्णय विश्वविद्यालय की 115वीं समिति की बैठक में लिया गया।
बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग (सीएसई) विभाग के प्रोफेसर पिंटू चंद्र शिल, औद्योगिक इंजीनियरिंग और प्रबंधन (आईईएम) विभाग के प्रोफेसर सुब्रता तलपत्रा और ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग (ईएसई) विभाग के सहायक प्रोफेसर निबीर मंडल शामिल हैं।
बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक 'ढाका ट्रिब्यून' के अनुसार, बर्खास्त किए गए अन्य दो कर्मचारी उप रजिस्ट्रार निमाई चंद्र मिस्त्री और कार्यालय सहायक सत्यजीत कुमार दत्ता हैं।
केयूईटी के रजिस्ट्रार इंजीनियर अनिचुर रहमान भुइयां के अनुसार, यह निर्णय विश्वविद्यालय की 115वीं समिति की बैठक में लिया गया। यह घटनाक्रम बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचारों के बीच आया है।
स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी कि इस सप्ताह की शुरुआत में, बांग्लादेश में एक हिंदू व्यक्ति की कथित तौर पर चाकू मारकर हत्या कर दी गई, जबकि एक अलग घटना में हिंदू परिवारों के तीन घरों में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई।
मृत हिंदू व्यक्ति की पहचान 43 वर्षीय रबेंद्र ऋषि के रूप में हुई है, जो एक सैलून के मालिक थे। मंगलवार शाम को मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिला में उधार पर बाल काटने से इनकार करने पर एक व्यक्ति ने उनकी चाकू मारकर हत्या कर दी।
पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर, बांग्लादेशी बंगाली दैनिक प्रोथोम आलो ने बताया कि आरोपी, 26 वर्षीय सद्दाम, ने रबेंद्र के सीने और गर्दन पर धारदार चाकू से वार किया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
सद्दाम की गिरफ्तारी के बाद भालुका मॉडल पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी (ओसी) मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम ने कहा कि आरोपी पागलों जैसा व्यवहार कर रहा है। उससे पूछताछ के लिए पांच दिन की रिमांड मांगी गई है। शव बरामद कर पोस्टमार्टम के बाद परिवार को सौंप दिया गया है।
एक अलग घटना में, सोमवार रात को रंगपुर जिले के पीरगंज उपजिला के चक करीमपुर गांव में हिंदू परिवारों के तीन घरों में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई। स्थानीय मीडिया ने पुलिस के हवाले से बताया कि यह घटना सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के बाद हुई, जिसमें कथित तौर पर मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची थी।
प्रभावित घर तीन भाइयों—बिशु चंद्र मोहंता (50), जगदीश चंद्र मोहंता (60), और दिनेश चंद्र मोहंता (46)—के थे।
'द डेली स्टार' से बात करते हुए बिशु ने बताया कि हमलावरों ने उनका टेलीविजन, फर्नीचर, दीवारें और दरवाजे तोड़ दिए और उनके घर से दो बकरियां चुरा लीं।
उनके भाई जगदीश और दिनेश ने बताया कि उनके घरों में भी तोड़फोड़ की गई, दरवाजे, बाड़ और फर्नीचर क्षतिग्रस्त कर दिए गए और टेलीविजन और अन्य कीमती सामान चोरी हो गए।
जगदीश की पत्नी आरती रानी ने बताया कि हमले के दौरान खुद को बचाने के लिए वह घर से भाग गई थीं। उन्होंने कहा कि जब हमलावर हमारे घर में घुस आए, तो हमने उनसे रुकने की गुहार लगाई। लेकिन उन्होंने मुझे जान से मारने की धमकी दी।
रंगपुर में हिंदू परिवारों पर हुए हमले की निंदा करते हुए बांग्लादेश की अवामी लीग ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय अगस्त 2024 से देश में लगातार असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।
पार्टी ने कहा कि धार्मिक अपमान के आरोप कभी भी भीड़ हिंसा, लूटपाट, धमकी या सामूहिक दंड का बहाना नहीं बनने चाहिए। हर आरोपी को उचित कानूनी प्रक्रिया का अधिकार है; हर पीड़ित को कानून के तहत समान सुरक्षा मिलनी चाहिए।















