सतना, अंबिका केशरी। जिले के सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की कथित लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। नागौद क्षेत्र के राजापुर गांव निवासी पूनम पांडे के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में लापरवाही और रिश्वत लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि समय पर उचित उपचार और निगरानी नहीं मिलने के कारण गर्भ में ही नवजात शिशु की मौत हो गई, जबकि प्रसूता की जान भी खतरे में पड़ गई थी।
परिजनों के अनुसार पूनम पांडे को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआत में पूजा रानी और डॉ. समीर गुप्ता की देखरेख में उपचार शुरू हुआ। सुबह करीब 10 बजे डॉक्टर ने मरीज की जांच कर स्थिति सामान्य बताई, लेकिन इसके बाद प्रसव पीड़ा बढ़ने और बच्चे का सिर दिखाई देने के बावजूद स्टाफ ने समय पर कोई आवश्यक कार्रवाई नहीं की। आरोप है कि परिजनों द्वारा कई बार बुलाने और कथित रूप से पैसे देने के बावजूद भी मरीज की समुचित देखभाल नहीं की गई।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि दोपहर करीब 2 बजे संबंधित स्टाफ लंच टाइम का हवाला देकर मरीज को उसी हालत में छोड़कर चला गया। बाद में ड्यूटी पर पहुंची दूसरी नर्स ने बताया कि उन्हें इस मरीज के संबंध में कोई जानकारी या हैंडओवर नहीं दिया गया था। परिजनों का कहना है कि यदि दूसरी नर्स समय पर नहीं पहुंचतीं तो प्रसूता की जान भी जा सकती थी। इसी दौरान इलाज में हुई देरी के कारण गर्भ में ही नवजात की मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जब चिकित्सा कर्मियों ने मरीज का केस अपने जिम्मे लिया था तो उन्हें पूरी जिम्मेदारी के साथ उपचार करना चाहिए था। यदि स्थिति संभालना संभव नहीं था तो समय रहते वरिष्ठ चिकित्सकों को बुलाया जाता या मरीज को रेफर किया जाता। परिजनों ने आरोप लगाया कि रिश्वत लेने के बावजूद भी मरीज की अनदेखी की गई और लापरवाही के कारण परिवार को अपना नवजात खोना पड़ा।
घटना के बाद पीड़ित परिवार सदमे में है और दोषी डॉक्टरों तथा नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग कर रहा है। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि परिजनों के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।




