नई दिल्ली। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सचिव एस. कृष्णन ने रविवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) स्वास्थ्य क्षेत्र में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि बीमारी की जांच, मेडिकल डायग्नोस्टिक्स, रिमोट आईसीयू मॉनिटरिंग और एआई-सहायता प्राप्त सर्जिकल प्लानिंग जैसे क्षेत्रों में इसके उपयोग से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, वहनीयता और गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।यह बात उन्होंने वाराणसी में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) और आईआईटी-बीएचयू के सेंटर फॉर इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (सीआईआईई) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 'एआई फॉर हेल्थ एंड असिस्टिव टेक्नोलॉजीज' विषयक टेक कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कही।

इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों और स्टार्टअप संस्थापकों ने भाग लिया तथा स्वास्थ्य सेवाओं, पहुंच और नागरिक कल्याण को आगे बढ़ाने में एआई की भूमिका पर चर्चा की।

अपने मुख्य संबोधन में कृष्णन ने विभिन्न विषयों में एआई शिक्षा को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि प्रौद्योगिकी, चिकित्सा विज्ञान और अनुसंधान के बीच बढ़ते समन्वय का उपयोग व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए किया जाना चाहिए।

उन्होंने आईआईटी-बीएचयू, एसटीपीआई, उद्योग जगत और स्टार्टअप्स के बीच मजबूत सहयोग की भी आवश्यकता बताई, ताकि बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले स्वास्थ्य और सहायक प्रौद्योगिकी समाधान विकसित किए जा सकें।

इसके साथ ही उन्होंने कहा, "एआई स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने, क्लिनिकल निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने और सेवा वितरण में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, विशेष रूप से उन समुदायों के लिए जहां स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित है।"

एमईआईटीवाई सचिव ने नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 'इंडियाएआई मिशन' और अन्य सरकारी पहलों के तहत उपलब्ध सहायता का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि एसटीपीआई स्टार्टअप्स को निवेशकों, वेंचर कैपिटल नेटवर्क और बाजार से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है, जिससे एक मजबूत और टिकाऊ नवाचार इकोसिस्टम विकसित हो सकता है।

वहीं, कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए एसटीपीआई के महानिदेशक अरविंद कुमार ने कहा कि पिछले तीन दशकों में भारत का प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम उल्लेखनीय रूप से विकसित हुआ है और अब देश के पास आईटी सेवा क्षेत्र में मिली सफलता को स्वदेशी एआई नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से दोहराने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम युवा नवाचारकर्ताओं को रोजगार पाने वालों से रोजगार सृजित करने वालों में बदलने में सफल रहा है। उन्होंने ट्रांसलेशनल रिसर्च, बौद्धिक संपदा सृजन और बाजार तक पहुंच के महत्व पर भी जोर दिया।

कुमार ने एसटीपीआई के 27 सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के नेटवर्क का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थापित तकनीकी केंद्रों के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता है। इसके लिए शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच और अधिक सहयोग जरूरी है।