नई दिल्ली। भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के संगठन एम्फी यानी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में एसआईपी प्रवाह (इन्फ्लो) जुलाई के 31,961 करोड़ रुपए के मुकाबले बढ़कर 32,297 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। अगस्त में एसआईपी का योगदान अब तक का उच्चतम स्तर रहा, जिसने मार्च में दर्ज किए गए 32,087 करोड़ रुपए और अगस्त में दर्ज किए गए 31,781 करोड़ रुपए के पिछले उच्चतम स्तर को पार कर लिया।एसआईपी खाते में योगदान भी सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो 10.2 करोड़ रुपए (9.9 करोड़) रहा। एम्फी के आंकड़ों के अनुसार, नए खातों की संख्या बढ़कर 66.39 लाख (61.44 लाख) हो गई, जबकि बंद किए गए खातों की संख्या 53.82 लाख (50.30 लाख) रही, जिससे कुल सक्रिय खातों की संख्या 10.62 करोड़ हो गई।

वहीं, सोने की बढ़ती कीमतों और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर निवेशकों के बढ़ते रुझान के बीच अगस्त 2026 में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (गोल्ड ईटीएफ) में निवेश में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई। एम्फी के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में गोल्ड ईटीएफ में शुद्ध निवेश बढ़कर 2,596.70 करोड़ रुपए पर पहुंच गया, जो जुलाई के 1,559 करोड़ रुपए की तुलना में करीब 67 प्रतिशत अधिक है।

उद्योग जगत के आंकड़ों से पता चलता है कि यह लगातार तीसरा महीना है जब गोल्ड ईटीएफ में सकारात्मक निवेश प्रवाह (इन्फ्लो) दर्ज किया गया है। घरेलू और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं, जिससे गोल्ड ईटीएफ की मांग मजबूत बनी हुई है।

वहीं, सोने के साथ-साथ चांदी आधारित निवेश उत्पादों में भी निवेशकों की रुचि बढ़ी है। एम्फी के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में सिल्वर ईटीएफ में 1,270.63 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया।

अगस्त के दौरान मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने की कीमतों में लगभग 7.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कीमतों में इस तेजी ने निवेशकों को गोल्ड ईटीएफ की ओर आकर्षित किया, क्योंकि यह सोने में निवेश का आसान और पारदर्शी माध्यम माना जाता है।

बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, वैश्विक आर्थिक चिंताओं और केंद्रीय बैंकों की नीतियों को लेकर बनी हुई असमंजस की स्थिति के बीच निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में सुरक्षित परिसंपत्तियों का हिस्सा बढ़ाया है।

वहीं, औद्योगिक मांग और निवेश मांग दोनों मजबूत रहने के कारण चांदी भी निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनी हुई है।

अगस्त के दौरान सक्रिय रूप से प्रबंधित इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में भी मजबूत निवेश देखने को मिला। इन स्कीम्स में 29,328.62 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया, जो जुलाई के 24,697.39 करोड़ रुपए की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक है।

यह लगातार बढ़ता निवेश दर्शाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का लंबी अवधि के इक्विटी निवेश पर भरोसा बना हुआ है।

म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि एसआईपी के माध्यम से निवेश का आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। अगस्त में एसआईपी के जरिए 32,297 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 31,961 करोड़ रुपए था।

लगातार बढ़ता एसआईपी निवेश इस बात का संकेत माना जा रहा है कि खुदरा निवेशक नियमित और अनुशासित निवेश रणनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इक्विटी योजनाओं के भीतर स्मॉलकैप फंड सबसे अधिक पसंद किए गए, जिनमें 7,973 करोड़ रुपए का निवेश दर्ज हुआ। इसके बाद मिडकैप फंड में 6,989 करोड़ रुपए, फ्लेक्सीकैप फंड में 5,059 करोड़ रुपए और लार्ज एंड मिडकैप फंड में 3,873 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया।

इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अभी भी उच्च वृद्धि क्षमता वाले क्षेत्रों में अवसर तलाश रहे हैं।

अगस्त में डेट म्यूचुअल फंड स्कीम्स से 8,127.32 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। इसके विपरीत, हाइब्रिड स्कीम्स में 10,045 करोड़ रुपए का निवेश आया।

हाइब्रिड श्रेणी में मल्टी एसेट एलोकेशन फंड में 3,671 करोड़ रुपए और आर्बिट्रेज फंड में 3,789 करोड़ रुपए का निवेश दर्ज किया गया। वहीं लिक्विड फंड्स में 19,934 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया, जबकि ओवरनाइट फंड्स से 30,654 करोड़ रुपए की निकासी हुई।