छतरपुर में अवैध प्लॉटिंग माफिया पर प्रशासन का 'हंटर': 100 से ज्यादा शिकायतों पर कॉलोनियां अवैध घोषित

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छतरपुर। जिले में बिना अनुमति और रेरा (RERA) के नियमों को ताक पर रखकर अवैध प्लॉटिंग करने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा मोर्चा खोल दिया है। लंबे समय से चल रहे इस खेल पर नकेल कसते हुए प्रशासन ने शहर की कई कॉलोनियों को अवैध घोषित कर दिया है। यह बड़ी कार्रवाई नगरीय निकाय मंत्री के सख्त निर्देशों के बाद अमल में लाई गई है, जिससे भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है।
100 से ज्यादा शिकायतों ने खोला राज
छतरपुर में प्लॉटिंग के नाम पर आम जनता से हो रही धोखाधड़ी की गूँज जब शासन तक पहुँची, तो प्रशासन सक्रिय हुआ। बताया जा रहा है कि लगभग 100 से ज्यादा लोगों ने लिखित में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें प्लॉट के नाम पर ठगा गया है और वहां न तो सड़क है, न बिजली और न ही डायवर्जन की कोई कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई है। इन शिकायतों की जांच के बाद प्रशासन ने पाया कि कई कॉलोनाइजर बगैर किसी परमीशन के धड़ल्ले से खेती की जमीन पर प्लॉट काट रहे थे।
रेरा की अनदेखी पड़ी भारी, अब FIR की तैयारी
नियमों के मुताबिक, किसी भी कॉलोनी को विकसित करने के लिए रेरा (Real Estate Regulatory Authority) का पंजीयन अनिवार्य है। लेकिन छतरपुर के प्लॉट माफिया ने इस कानून की जमकर धज्जियां उड़ाईं। प्रशासन ने अब उन सभी कॉलोनियों की सूची तैयार कर ली है जो कागजों पर अवैध हैं। बड़ी खबर यह है कि केवल कॉलोनी को अवैध घोषित करने तक मामला नहीं रुकेगा; अब इन कॉलोनाइजरों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की तैयारी की जा रही है, ताकि जनता के पैसे से खिलवाड़ करने वालों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
नगरीय निकाय मंत्री के तेवर सख्त
सूत्रों की मानें तो स्थानीय प्रशासन की सुस्ती पर नगरीय निकाय मंत्री ने कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। मंत्री के स्पष्ट आदेश थे कि अवैध कॉलोनाइजिंग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद कलेक्टर और नगर पालिका की टीम ने संयुक्त रूप से सर्वे कर इन अवैध निर्माणों पर लाल निशान लगा दिए हैं।
प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि किसी भी कॉलोनी में प्लॉट खरीदने से पहले उसका रेरा नंबर, डायवर्जन और नगर पालिका की अनुमति जरूर चेक करें, वरना उनकी जमापूंजी डूब सकती है।


