कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार 2024 में आरजी कर रेप और हत्याकांड के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले डॉक्टरों और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेगी। पिछली ममता बनर्जी की सरकार में प्रदर्शनों में शामिल डॉक्टरों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।राज्य सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि कलकत्ता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस बिस्वजीत बसु की अध्यक्षता में गठित न्यायिक आयोग की सिफारिशों पर आधारित राज्य सरकार मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। सूत्रों ने बताया कि आयोग उन मामलों की पहचान करेगा, जिनमें कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों पर आरजी कर रेप और मर्डर मामले में न्याय की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को दबाने या उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से केस दर्ज किए गए थे।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस प्रशासन 14 अगस्त 2024 की आधी रात को उत्तरी कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में तोड़फोड़ और हिंसा में लोगों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू करेगा। आरोप है कि हिंसा के पीछे के दो मकसद थे। पहला अस्पताल परिसर में घटनास्थल पर सबूतों को नष्ट करना और दूसरा महिला डॉक्टर के रेप और हत्याकांड के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों से मीडिया का ध्यान हटाना।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आरजी कर मामले को फिर से खोलने का आदेश दिया। उन्होंने इस मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों कोलकाता पुलिस के पूर्व आयुक्त विनीत कुमार गोयल, पूर्व डीसीपी (नॉर्थ डिवीजन) अभिषेक गुप्ता और पूर्व डीसीपी (सेंट्रल डिवीजन) इंदिरा मुखर्जी को भी सस्पेंड किया। साथ ही, उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई है।
सूत्रों ने कहा, "आरजी कर मामले पर नई सरकार का रुख साफ है।" उन्होंने आगे कहा, "प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ करके बड़ी साजिश को कमजोर करने की कोशिशों में सीधे या परोक्ष रूप से शामिल लोगों को सजा मिले, साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को उन मामलों और उत्पीड़न से मुक्त किया जाए जिन्हें अनावश्यक माना जाता है।"




