बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मोरखा स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र (Bank of Maharashtra) में 1.34 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बैंक के असिस्टेंट मैनेजर और दो बार नौवीं फेल एक नाबालिग ने मिलकर इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। पुलिस अब तक इस मामले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और गहराई से जांच कर रही है।


कैसे दिया गया फर्जीवाड़े को अंजाम?

पुलिस अधीक्षक (SP) वीरेंद्र जैन के अनुसार, इस ठगी का ताना-बाना बेहद शातिर तरीके से बुना गया था: वह नाबालिग गांव के खाताधारकों को अच्छी तरह जानता था। गांव के कई लोग नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते थे और अपनी पासबुक अपडेट कराने बैंक आते थे। इसी जानकारी का फायदा उठाकर उन खातों को निशाना बनाया गया, जो नेट बैंकिंग से जुड़े थे। बैंक के असिस्टेंट मैनेजर लोकेश गुखे के पास बैंक की आधिकारिक आईडी और अधिकार थे। आरोप है कि उसने नियमों को ताक पर रखकर खाताधारकों के नेट बैंकिंग से जुड़े रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदल दिए। नंबर बदलने के बाद ओटीपी (OTP) और अन्य विवरणों के जरिए खातों से मोटी रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर ली गई। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि मोबाइल नंबर बदलते समय अनिवार्य सत्यापन (Verification) किया गया था या नहीं।


1.14 करोड़ रुपए गौरव सूर्यवंशी के खाते में पहुंचे

पुलिस के मुताबिक, धोखाधड़ी की सबसे बड़ी रकम—करीब 1 करोड़ 14 लाख रुपये—गौरव सूर्यवंशी नाम के टैक्सी ड्राइवर के खाते में ट्रांसफर हुई। इसके अलावा असिस्टेंट मैनेजर की मां शीला गुखे और नाबालिग के तीन रिश्तेदारों के खातों में भी ठगी की रकम पहुंची। जांच में सामने आया कि नाबालिग के रिश्तेदार मिथिलेश सोनी के नाम पर कियोस्क सेंटर की आईडी थी, लेकिन उस सेंटर को असल में नाबालिग ही संचालित करता था।


7 गिरफ्तारियां और जब्त संपत्तियां

पुलिस इस मामले में अब तक 6 अलग-अलग अपराध दर्ज कर चुकी है और कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है:

  1. लोकेश गुखे (असिस्टेंट मैनेजर)
  2. मुख्य आरोपी नाबालिग
  3. गौरव सूर्यवंशी (टैक्सी ड्राइवर)
  4. मिथिलेश सोनी (नाबालिग का रिश्तेदार)
  5. शैलेंद्र सोनी
  6. मयंक सोनी
  7. शीला गुखे (असिस्टेंट मैनेजर की मां)

जांच के दौरान आरोपियों के पास से 10 लाख रुपये की नई मारुति कार, महंगे मोबाइल फोन, 8.28 लाख रुपये का सोना और 1.40 लाख रुपये की चांदी सहित कुल 22.33 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या ये लग्जरी चीजें ठगी के पैसों से खरीदी गई थीं।


कैसे खुला मामला? रिटायर्ड शिक्षक की शिकायत से हुआ पर्दाफाश

यह पूरा फर्जीवाड़ा इसी साल जनवरी से चल रहा था और तीन-चार महीनों के भीतर बड़े पैमाने पर लेन-देन को अंजाम दिया गया। 21 अक्टूबर को रिटायर्ड शिक्षक गेंदाराम सोनी ने पहली शिकायत दर्ज कराई थी, जिनके खाते से 7 लाख रुपये ट्रांसफर हो गए थे। इसके बाद अन्य खाताधारकों ने भी बैंक रिकॉर्ड की जांच कराई तो धोखाधड़ी का यह बड़ा सच सामने आया। पुलिस इस एंगल की भी जांच कर रही है कि क्या कुछ जीवित खाताधारकों को बैंक रिकॉर्ड में मृत (Dead) दिखाकर उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की रकम हड़पने की कोशिश की गई थी। जांच में 6 जीवित खाताधारकों से जुड़े मृत्यु प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल का भी संदेह है।


बैंक की एसओपी (SOP) और सुरक्षा पर सवाल

एसपी ने बताया कि पुलिस बैंक की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की भी जांच कर रही है कि बिना समुचित सत्यापन के एक कर्मचारी अकेले कैसे मोबाइल नंबर बदल सकता था। इस लापरवाही की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है, और बैंक खाताधारकों की सुरक्षा के लिए जल्द ही एक एडवाइजरी भी जारी की जाएगी। मामले में आगे और भी गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।