सागर, जीशान खान। इमारती लकड़ी के व्यापार का लाइसेंस जारी करने के एवज में रिश्वत लेने वाले वनरक्षक को विशेष न्यायालय ने चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। दक्षिण वन मंडल कार्यालय में पदस्थ वनरक्षक राजकुमार मौर्य को लोकायुक्त पुलिस ने 4 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। मामले की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) शहाबुद्दीन हाशमी की अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए चार वर्ष के कारावास से दंडित किया।
लाइसेंस के बदले मांगी थी 10 हजार रुपए की रिश्वत
अभियोजन के अनुसार देवरी निवासी नीलेश जाटव ने फरवरी 2023 में इमारती लकड़ी के व्यापार के पंजीयन के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। लाइसेंस प्राप्त करने के लिए उनके भाई वीरेंद्र जाटव दक्षिण वन मंडल कार्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि वहां पदस्थ वनरक्षक राजकुमार मौर्य ने लाइसेंस जारी करने के बदले 10 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की।
वीरेंद्र जाटव ने इतनी राशि देने में असमर्थता जताई, जिसके बाद बातचीत के दौरान रिश्वत की रकम 5 हजार रुपए तय हुई। आरोपी ने 16 जून 2023 को 1 हजार रुपए अग्रिम रिश्वत लेकर लाइसेंस जारी कर दिया था और शेष 4 हजार रुपए बाद में देने के लिए कहा था।
लोकायुक्त में शिकायत के बाद बिछाया गया ट्रैप
शेष रिश्वत की रकम मांगने के बाद वीरेंद्र जाटव ने मामले की शिकायत लोकायुक्त पुलिस सागर से की। शिकायत का सत्यापन किए जाने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने 21 जून 2023 को दक्षिण वन मंडल कार्यालय के बाहर ट्रैप की कार्रवाई की।
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कार्रवाई के दौरान वनरक्षक राजकुमार मौर्य को शिकायतकर्ता से 4 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया गया।
केमिकल टेस्ट और वॉयस रिकॉर्डिंग बने अहम सबूत
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने रिश्वत की रकम, केमिकल टेस्ट, रिश्वत संबंधी बातचीत की वॉयस रिकॉर्डिंग और एफएसएल रिपोर्ट सहित अन्य साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। ये साक्ष्य अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण साबित हुए।
आरोपी की ओर से यह दलील भी दी गई कि उसके अधिकार क्षेत्र में संबंधित लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं था। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने वनरक्षक राजकुमार मौर्य को दोषी माना।
चार साल के कारावास की सजा
विशेष न्यायालय ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद आरोपी वनरक्षक राजकुमार मौर्य को दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए वनरक्षक को सजा मिलने के बाद यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।












